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SCR प्राधिकरण कैसे काम करता है: कौन बैठता है, कौन तय करता है, कब लेगा आकार

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लखनऊ और आसपास के पांच जिलों के स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के बारे में ज़्यादातर बातचीत सड़क, मेट्रो और रिंग रोड पर होती है। पर इन सबके पीछे एक सवाल है, जिस पर कम बात होती है: यह सब तय कौन करेगा? इसका जवाब है उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन विकास प्राधिकरण। यह कैसे बना है और कैसे काम करता है, यह समझना हर उस व्यक्ति के लिए ज़रूरी है जो इन छह जिलों में रहता है, पढ़ता है या कारोबार करता है।

कानून कहां से आया

प्राधिकरण का आधार उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र और अन्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2024 है। जुलाई 2024 में पहले अध्यादेश के ज़रिए SCR और उसका प्राधिकरण बनाया गया, फिर विधानसभा से विधेयक पास होकर यह कानून बना।12 इसमें लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी शामिल हैं, और प्राधिकरण का मुख्यालय लखनऊ है।3

कानून के नाम में "अन्य क्षेत्र" भी है। इसका मतलब है कि सरकार इसी कानून के तहत अधिसूचना जारी करके प्रदेश में दूसरे क्षेत्र भी बना सकती है, उनकी सीमाएं बदल सकती है या उन्हें मिला सकती है।1

प्राधिकरण में कौन बैठता है

कानून की धारा 4 बताती है कि प्राधिकरण में कौन-कौन होगा।1 इसमें सबसे ऊपर राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व है, और नीचे वे लोग जो ज़मीन पर काम करते हैं:

भूमिका कौन
अध्यक्ष मुख्यमंत्री
उपाध्यक्ष मुख्य सचिव
सदस्य और संयोजक आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव
विभागों के प्रतिनिधि वित्त, विधि, राजस्व, नियोजन, नगर विकास, लोक निर्माण समेत कई विभागों के शीर्ष अधिकारी
इलाके के अफ़सर क्षेत्र के मंडलायुक्त और जिलाधिकारी, और विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष
तकनीकी और परिवहन मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक
केंद्र के प्रतिनिधि रेलवे और रक्षा मंत्रालय के नामित प्रतिनिधि
विशेषज्ञ सरकार की ओर से नियुक्त अधिकतम पांच विशेषज्ञ
रोज़ का कामकाज मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और एक पूर्णकालिक सदस्य सचिव

कानून के मुताबिक़ प्राधिकरण की बैठक हर तीन महीने में कम से कम एक बार होनी चाहिए।1

मेरी नज़र में इस ढांचे की सबसे ख़ास बात यह है कि रेलवे, मेट्रो, लोक निर्माण, राजस्व और जिलों के अफ़सर एक ही मेज़ पर हैं। अब तक हर विभाग अपनी योजना अलग बनाता रहा है। एक जगह बैठकर तालमेल हो, यही SCR का मूल विचार है।

असली काम कार्यकारी समिति के पास

प्राधिकरण बड़ा है और उसकी बैठकें कम होती हैं। रोज़ का काम कानून की धारा 5 और 10 के तहत बनी कार्यकारी समिति संभालती है।1 इसके अध्यक्ष प्राधिकरण के CEO होते हैं। सदस्यों में ये लोग हैं:

  • नगर विकास, लोक निर्माण, परिवहन, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे विभागों के प्रतिनिधि
  • मेट्रो के प्रबंध निदेशक
  • क्षेत्र के सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष
  • नगर निगमों के आयुक्त
  • जिलों के मुख्य विकास अधिकारी
  • एक शहरी नियोजन विशेषज्ञ

यह समिति रीजनल प्लान बनाने में मदद करती है, यह देखती है कि हर प्रोजेक्ट प्लान के मुताबिक़ हो, और प्रोजेक्ट व टेंडर मंज़ूर करती है।1

सितंबर 2026 में SCR के बेस मैप को मंज़ूरी मिली थी। वह मंज़ूरी लखनऊ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में दी थी, और अब यह मैप कार्यकारी समिति के पास जाएगा।4 यानी जो रास्ता कानून ने तय किया है, काम उसी पर आगे बढ़ रहा है।

प्राधिकरण क्या-क्या कर सकता है

कानून की धारा 8 कहती है कि प्राधिकरण का मुख्य मक़सद है कि पूरे क्षेत्र का विकास रीजनल प्लान के मुताबिक़ हो।1 इसके लिए उसके मुख्य काम ये हैं:

  • रीजनल प्लान बनाना। इसकी ज़िम्मेदारी अभी LDA निभा रहा है, जो GIS तकनीक से 2051 तक का प्लान तैयार कर रहा है।5
  • तालमेल बैठाना। विकास प्राधिकरणों, नगर निकायों, पंचायतों और विभागों के मास्टर प्लान और प्रोजेक्ट को रीजनल प्लान से जोड़ना।
  • निगरानी। यह देखना कि सरकारी और निजी, दोनों तरह के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट रीजनल प्लान के अनुरूप हों।
  • पैसे की व्यवस्था। चुने हुए प्रोजेक्ट के लिए सरकारी अनुदान, कर्ज़ और दूसरे स्रोतों से पैसा जुटाना और उसकी निगरानी।

इसके लिए कानून प्राधिकरण को कई अधिकार भी देता है (धारा 9):1

  • किसी भी विभाग या निकाय से जानकारी मांगना
  • प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट चुनना
  • स्थानीय निकायों को निर्देश देना
  • क्षेत्र के विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान से जुड़े वे अधिकार इस्तेमाल करना, जो पहले सरकार के पास थे

एक बार अंतिम रीजनल प्लान प्रकाशित हो जाए, तो उससे टकराने वाली कोई विकास योजना नहीं बन सकेगी (धारा 36)।1

कब लेगा आकार, और आपकी राय कब

यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है। कानून की धारा 14 के मुताबिक़ प्राधिकरण पहले ड्राफ्ट रीजनल प्लान बनाएगा और उसे जांच के लिए सार्वजनिक करेगा। उस पर आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे, और उन पर विचार करने के बाद ही प्लान अंतिम होगा। अंतिम प्लान की सूचना छपेगी, जिसमें बताया जाएगा कि उसकी प्रति कहां देखी जा सकती है।1

अभी काम बेस मैप तक पहुंचा है, ड्राफ्ट रीजनल प्लान आना बाकी है।4 जब ड्राफ्ट आएगा, तब आपको देखना होगा कि आपके गांव, मोहल्ले या ज़मीन वाले इलाके को किस उपयोग में दिखाया गया है: रिहायशी, औद्योगिक, कारोबारी, हरित या कृषि। SCR Times ड्राफ्ट आते ही उसे आसान भाषा में समझाएगा और आपत्ति-सुझाव देने का तरीका भी बताएगा।

आपके लिए इसका मतलब

  • घर या ज़मीन लेने से पहले यह समझ लें कि अभी सिर्फ़ बेस मैप बना है, रीजनल प्लान नहीं। किसी इलाके के "SCR हब" बनने का दावा तब तक सिर्फ़ दावा है, जब तक अंतिम प्लान में दर्ज न हो।
  • कारोबारियों के लिए एक ही प्राधिकरण से तालमेल का मतलब है कि आगे चलकर बड़े प्रोजेक्ट और औद्योगिक इलाके एक ही नक्शे के हिसाब से तय होंगे।
  • ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के प्रतिनिधियों के लिए ड्राफ्ट प्लान पर राय देने का मौका सबसे अहम होगा। उसकी तैयारी अभी से करना समझदारी है।

SCR की बाकी बुनियादी जानकारी SCR क्या है पेज पर है, और प्रोजेक्ट की ताज़ा स्थिति इंफ्रा ट्रैकर पर।