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इंफ्रा ट्रैकर

NCDC लखनऊ क्षेत्रीय शाखा — जैतीखेड़ा (सरोजनीनगर) का रोग-निगरानी केंद्र और लैब

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की क्षेत्रीय शाखा लखनऊ के सरोजनीनगर इलाके में जैतीखेड़ा में बन रही है। यह अस्पताल नहीं, बल्कि बीमारियों की निगरानी, जांच और ट्रेनिंग का केंद्र होगा।

जानकारी जांची गई: | एससीआर टाइम्स

इंफ्रा ट्रैकर2.5 एकड़जैतीखेड़ा, सरोजनीनगरSCR Times · एससीआर टाइम्स

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत काम करता है।6 इसकी एक क्षेत्रीय शाखा लखनऊ के सरोजनीनगर इलाके में जैतीखेड़ा में 2.5 एकड़ ज़मीन पर बन रही है।1 NCDC की अपनी वेबसाइट भी लखनऊ में क्षेत्रीय शाखा की योजना बताती है।4 PM-ABHIM के तहत देश में पांच क्षेत्रीय शाखाएं बननी हैं: उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और असम में।4

एक नज़र में

क्या जानकारी
संस्था राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय6
लखनऊ में क्या NCDC की क्षेत्रीय शाखा4
जगह जैतीखेड़ा, सरोजनीनगर इलाका, लखनऊ1
ज़मीन 2.5 एकड़, राज्य सरकार की ओर से मुफ़्त, 30 साल की लीज़1
राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी 19 अप्रैल 202212
MoU मई 2022, राज्य सरकार और NCDC के बीच3
पैसा निर्माण का एक-बार का ख़र्च PM-ABHIM से4
लैब नई शाखाओं में BSL-2 स्तर की जांच सुविधा5; लखनऊ में BSL-3 की आधिकारिक पुष्टि नहीं
निर्माण एजेंसी नियम: CPWD या राज्य की मंज़ूर एजेंसी4; लखनऊ के लिए नाम सार्वजनिक नहीं
स्थिति प्रक्रिया में — मौके पर निर्माण तेज़ी से जारी; आधिकारिक लक्ष्य-तिथि सार्वजनिक नहीं

अब तक के क़दम

तारीख़ क्या हुआ
19 अप्रैल 2022 प्रदेश कैबिनेट ने जैतीखेड़ा की 2.5 एकड़ ज़मीन NCDC को 30 साल की लीज़ पर मुफ़्त देने की मंज़ूरी दी12
मई 2022 राज्य सरकार और NCDC के बीच MoU3
6 सितंबर 2022 केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने छह राज्यों में NCDC शाखाओं की आधारशिला वर्चुअल रूप से रखी; उत्तर प्रदेश उनमें था (ख़बर में शहर का नाम नहीं)12
12 अक्टूबर 2026 NCDC की वेबसाइट: सभी 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में ज़मीन तय और MoU पूरे; बिहार, आंध्र प्रदेश और झारखंड में निर्माण पूरा, 19 शाखाओं में काम जारी (सूची नहीं दी गई)4

यह केंद्र क्या करेगा

DGHS के मुताबिक़ NCDC के मुख्य काम ये हैं:6

  • राज्यों के साथ मिलकर संक्रामक बीमारियों की निगरानी
  • बीमारी फैलने पर जांच, रोकथाम के उपाय और तुरंत कार्रवाई
  • रेफ़रल लैब जांच, यानी जो जांच ज़िले में न हो सके उसकी सुविधा
  • मच्छर जैसे रोग फैलाने वाले कीटों का अध्ययन और दवाओं के बेअसर होने (AMR) पर काम
  • पब्लिक हेल्थ, लैब और कीट-विज्ञान से जुड़े लोगों की ट्रेनिंग और शोध

MoU के समय राज्य सरकार ने कहा था कि लखनऊ केंद्र एकीकृत रोग निगरानी, रेफ़रल जांच, बीमारी फैलने की तैयारी और मच्छर-जनित रोगों के कीटों की निगरानी में मदद करेगा, और डेंगू, जापानी इंसेफ़ेलाइटिस और चिकनगुनिया पर नियंत्रण में काम आएगा।3

लैब: BSL-2 और BSL-3

बायोसेफ़्टी लेवल (BSL) बताता है कि कोई लैब किस तरह के रोगाणुओं पर कितने सुरक्षा इंतज़ाम के साथ काम कर सकती है। NCDC ने नई शाखाओं की लैब के लिए BSL-2 और बिना-BSL लैब की डिज़ाइन गाइडेंस जारी की है, और हर नई शाखा में BSL-2 स्तर की जांच सुविधा होगी।45 BSL-3 लैब NCDC की अलग योजना है: चरणों में 10 BSL-3 लैब बननी हैं, और जनवरी 2024 में जिनकी आधारशिला रखी गई, वे हिमाचल प्रदेश और झारखंड की थीं।7 लखनऊ शाखा में BSL-3 लैब की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली।

निर्माण की स्थिति

NCDC के आधिकारिक पेज पर लखनऊ के लिए सिर्फ़ इतना है कि यहां क्षेत्रीय शाखा शुरू करने की योजना है; काम कितना हुआ, एजेंसी कौन है और लागत कितनी है, ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं।4 SCR Times के संपादक अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने अक्टूबर 2026 में जैतीखेड़ा में निर्माण तेज़ी से चलता देखा है। उनका आकलन है कि केंद्र अगले एक से दो साल में तैयार हो सकता है — यह आधिकारिक लक्ष्य-तिथि नहीं है। पूरा ब्योरा उनके कॉलम लखनऊ में तेज़ी से बन रही NCDC की क्षेत्रीय शाखा में है।

बड़ी तस्वीर: PM-ABHIM और प्रदेश का नेटवर्क

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) 2021-22 से 2025-26 के लिए 64,180 करोड़ रुपये की योजना है। इसमें NCDC को मज़बूत करना, 5 नई क्षेत्रीय NCDC शाखाएं और 20 मेट्रोपॉलिटन हेल्थ सर्विलांस यूनिट शामिल हैं।9 जुलाई 2023 तक उत्तर प्रदेश के लिए 75 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को प्रशासनिक मंज़ूरी मिल चुकी थी।9 मक़सद ब्लॉक से राष्ट्रीय स्तर तक निगरानी लैब का जुड़ा हुआ नेटवर्क है।8

उत्तर प्रदेश में NCDC की वाराणसी शाखा 1965 से चल रही है; वह फ़ाइलेरिया पर काम करती है और प्रदेश में IDSP को मदद देती है।10 लखनऊ की क्षेत्रीय शाखा बनने के बाद भी वाराणसी की राज्य-शाखा चलती रहेगी।4 लखनऊ में SGPGI और KGMU पहले से इन्फ़्लुएंज़ा वायरस की जांच करने वाली नेटवर्क लैब में गिने जाते हैं।11

आपके लिए इसका मतलब

  • परिवारों के लिए: यह इलाज की जगह नहीं होगी। फ़ायदा परोक्ष है: बीमारी फैलने के संकेत जल्दी पकड़ना और जांच में मदद।
  • SCR के जिलों के लिए: हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी पर सीधा असर शाखा के दायरे पर निर्भर करेगा, जो आधिकारिक रूप से सामने आना बाकी है। SCR क्या है, यह इस पेज पर है।
  • नौकरी और ट्रेनिंग: भर्ती या ट्रेनिंग की कोई सूचना सिर्फ़ NCDC या स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर ही देखें; किसी एजेंट या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें।
  • आगे क्या देखें: आधिकारिक लक्ष्य-तिथि और शाखा का दायरा। पुष्ट होते ही यह पेज और इंफ्रा ट्रैकर अपडेट होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लखनऊ में NCDC कहां बन रहा है?
सरोजनीनगर इलाके के जैतीखेड़ा में। राज्य सरकार ने इसके लिए 2.5 एकड़ ज़मीन 30 साल की लीज़ पर मुफ़्त दी है; कैबिनेट ने इसे 19 अप्रैल 2022 को मंज़ूरी दी थी।
क्या NCDC लखनऊ में इलाज होगा?
नहीं। NCDC अस्पताल नहीं है। इसका काम संक्रामक बीमारियों की निगरानी, बीमारी फैलने पर जांच और कार्रवाई, रेफ़रल लैब जांच, मच्छर जैसे कीटों का अध्ययन और पब्लिक हेल्थ ट्रेनिंग है।
क्या लखनऊ की NCDC शाखा में BSL-3 लैब होगी?
इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली। NCDC की वेबसाइट के मुताबिक़ हर नई शाखा में BSL-2 स्तर की जांच सुविधा होगी। BSL-3 लैब NCDC की अलग योजना है।
NCDC लखनऊ कब तक तैयार होगा?
आधिकारिक लक्ष्य-तिथि सार्वजनिक नहीं है। मौके पर निर्माण तेज़ी से चल रहा है; SCR Times के संपादक का आकलन है कि केंद्र अगले एक से दो साल में तैयार हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में NCDC की और कौन सी शाखा है?
वाराणसी में NCDC की शाखा 1965 से चल रही है। उत्तर प्रदेश में लखनऊ की क्षेत्रीय शाखा और वाराणसी की राज्य-शाखा, दोनों चलेंगी।