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लखनऊ में तेज़ी से बन रही NCDC की क्षेत्रीय शाखा: सरोजनीनगर का रोग-निगरानी केंद्र

जानकारी जांची गई: | प्रकाशित:

लखनऊ को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की एक क्षेत्रीय शाखा मिलने वाली है। राज्य सरकार ने इसके लिए सरोजनीनगर इलाके के जैतीखेड़ा में 2.5 एकड़ ज़मीन मुफ़्त दी है।1 NCDC की अपनी वेबसाइट भी कहती है कि लखनऊ में एक क्षेत्रीय शाखा शुरू करने की योजना है।4 यह अस्पताल नहीं, बल्कि बीमारियों पर नज़र रखने और जांच करने वाला केंद्र होगा। यहां तीन बातें हैं: क्या पक्का है, क्या अभी साफ़ नहीं है, और लखनऊ समेत पूरे SCR के लिए इसका मतलब क्या है।

NCDC क्या करता है

NCDC केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत काम करता है। इसकी शुरुआत 1909 में कसौली में सेंट्रल मलेरिया ब्यूरो के रूप में हुई थी। 1963 में यह राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (NICD) बना, और 2009 में NCDC।6

DGHS के मुताबिक़ NCDC के मुख्य काम ये हैं:6

  • राज्यों के साथ मिलकर संक्रामक बीमारियों की निगरानी
  • बीमारी फैलने पर जांच, रोकथाम के उपाय सुझाना और तुरंत कार्रवाई
  • रेफ़रल जांच, यानी जो जांच ज़िले में न हो सके, उसके लिए लैब की मदद
  • मच्छर जैसे रोग फैलाने वाले कीटों का अध्ययन, और दवाओं के बेअसर होने (AMR) पर काम
  • पब्लिक हेल्थ, लैब और कीट-विज्ञान से जुड़े लोगों की ट्रेनिंग और शोध

एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) NCDC का ही एक तकनीकी विभाग है।6 IDSP ने अपने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म IHIP पर आम लोगों के लिए बीमारी की सूचना देने का एक टूल भी जारी किया है।7

लखनऊ में क्या बनना है

कहानी अप्रैल 2022 से शुरू होती है। 19 अप्रैल 2022 को राज्य कैबिनेट ने जैतीखेड़ा की ज़मीन NCDC को मुफ़्त देने की मंज़ूरी दी। ज़मीन 30 साल की लीज़ पर दी गई। NCDC ने क्षेत्रीय केंद्र के लिए मुफ़्त ज़मीन की शर्त रखी थी। तब बताया गया कि देश में ऐसे छह केंद्र बनेंगे, और लखनऊ उनमें एक है।12

मई 2022 में राज्य सरकार और NCDC ने समझौते (MoU) पर दस्तख़त किए। राज्य सरकार के मुताबिक़ यह केंद्र ये काम करेगा:3

  • एकीकृत रोग निगरानी में मदद
  • जांच की रेफ़रल सुविधा बढ़ाना
  • बीमारी फैलने की स्थिति के लिए स्वास्थ्य ढांचे को तैयार रखना
  • मच्छर से फैलने वाले रोगों के लिए कीटों की निगरानी

राज्य सरकार ने कहा कि केंद्र डेंगू, जापानी इंसेफ़ेलाइटिस और चिकनगुनिया पर नियंत्रण में मदद करेगा।3

6 सितंबर 2022 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने छह राज्यों में NCDC शाखाओं की आधारशिला वर्चुअल तरीके से रखी। इनमें उत्तर प्रदेश भी था, पर ख़बर में शहर का नाम नहीं है।12

बाद में एक अहम फ़ैसला हुआ। PM-ABHIM के तहत पांच क्षेत्रीय शाखाएं बनाना तय हुआ: उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और असम में। बाकी राज्यों में राज्य-शाखा क्षेत्रीय शाखा में मिल जाएगी। उत्तर प्रदेश अपवाद है। यहां लखनऊ में क्षेत्रीय शाखा और वाराणसी में राज्य-शाखा, दोनों चलेंगी।4 वाराणसी शाखा 1965 से चल रही है। वह फ़ाइलेरिया पर काम करती है और प्रदेश में IDSP को मदद देती है।10

लैब: BSL-3 की बात कितनी पक्की

इस प्रोजेक्ट के साथ अक्सर बायोसेफ़्टी लेवल-3 (BSL-3) लैब का ज़िक्र होता है, इसलिए यह साफ़ करना ज़रूरी है। बायोसेफ़्टी लेवल बताता है कि कोई लैब कितने सुरक्षा इंतज़ाम के साथ किस तरह के रोगाणुओं पर काम कर सकती है।

NCDC ने नई शाखाओं की लैब के डिज़ाइन के लिए BSL-2 और बिना-BSL लैब की गाइडेंस जारी की है।4 उसकी वेबसाइट कहती है कि हर नई शाखा में BSL-2 स्तर की जांच सुविधा होगी।5 BSL-3 लैब एक अलग योजना है। NCDC ने चरणबद्ध तरीके से 30 राज्य-शाखाएं, 5 क्षेत्रीय शाखाएं और 10 BSL-3 लैब बनाने की योजना बताई है। जनवरी 2024 में BSL-3 लैब की जो आधारशिला रखी गई, वह हिमाचल प्रदेश और झारखंड के लिए थी।7

लखनऊ की NCDC शाखा में BSL-3 लैब होगी, इसकी पुष्टि मुझे किसी आधिकारिक स्रोत में नहीं मिली। इसलिए मैं इसे पक्की बात की तरह नहीं लिख रहा। 2022 में राज्य सरकार ने यह ज़रूर कहा था कि NCDC बांदा जिले में एक BSL-4 लैब बनाने में भी मदद करेगा।3 बांदा SCR से बाहर है।

निर्माण अभी किस चरण में है

NCDC की वेबसाइट का शाखा-विभाग वाला पेज 12 अक्टूबर 2026 को अपडेट हुआ। उसके मुताबिक़ सभी 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में ज़मीन तय हो चुकी है और सभी के साथ MoU हो चुके हैं। बिहार, आंध्र प्रदेश और झारखंड में निर्माण पूरा हो गया है, और 19 शाखाओं में निर्माण चल रहा है। निर्माण CPWD या राज्य की मंज़ूर एजेंसियां करती हैं।4

उसी पेज पर लखनऊ के लिए सिर्फ़ इतना लिखा है कि यहां क्षेत्रीय शाखा शुरू करने की योजना है।4 जिन 19 शाखाओं में काम चल रहा है, उनकी सूची पेज पर नहीं है। जैतीखेड़ा से मेरा अक्सर गुज़रना होता है, और वहां निर्माण का काम बड़ी तेज़ी से चल रहा है। जिस रफ़्तार से काम दिख रहा है, उससे मुझे उम्मीद है कि अगले एक से दो साल में यह केंद्र बनकर तैयार हो जाएगा। पर यह मेरा अपना आकलन है, आधिकारिक लक्ष्य-तिथि नहीं। लखनऊ का काम कितने प्रतिशत हुआ, कौन सी एजेंसी बना रही है और लागत कितनी है, इन पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक आंकड़ा मुझे नहीं मिला। आधिकारिक जानकारी आते ही SCR Times यह हिस्सा अपडेट करेगा।

देश के स्तर पर दिसंबर 2024 की सरकारी समीक्षा में बताया गया था कि 26 राज्य-शाखाएं, 5 क्षेत्रीय शाखाएं, 10 BSL-3 लैब और 20 मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट अलग-अलग चरणों में हैं।8

PM-ABHIM से जुड़ाव

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) 2021-22 से 2025-26 के लिए 64,180 करोड़ रुपये की योजना है। इसके केंद्रीय हिस्सों में NCDC को मज़बूत करना, 5 नई क्षेत्रीय NCDC और 20 मेट्रोपॉलिटन हेल्थ सर्विलांस यूनिट शामिल हैं।9 NCDC के मुताबिक़ शाखाओं का निर्माण जैसा एक-बार का ख़र्च PM-ABHIM से आता है।4

इसी मिशन में ज़िला स्तर की लैब भी हैं। जुलाई 2023 तक उत्तर प्रदेश के लिए 75 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को प्रशासनिक मंज़ूरी मिल चुकी थी।9 मिशन का मक़सद ब्लॉक, ज़िला, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी लैब का एक जुड़ा हुआ नेटवर्क बनाना है।8 लखनऊ की क्षेत्रीय शाखा इसी सीढ़ी की एक कड़ी है।

एक नज़र में

क्या जानकारी
संस्था राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय6
लखनऊ में क्या NCDC की क्षेत्रीय शाखा4
जगह जैतीखेड़ा, सरोजनीनगर इलाका1
ज़मीन 2.5 एकड़, मुफ़्त, 30 साल की लीज़1
राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी 19 अप्रैल 202212
MoU मई 20223
पैसा निर्माण का ख़र्च PM-ABHIM से4
लैब नई शाखाओं में BSL-2 स्तर की जांच सुविधा5; लखनऊ में BSL-3 की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली
निर्माण एजेंसी नियम: CPWD या राज्य की मंज़ूर एजेंसी4; लखनऊ के लिए नाम सार्वजनिक नहीं मिला
निर्माण की स्थिति जैतीखेड़ा में काम तेज़ी से जारी (संपादक ने ख़ुद देखा); आधिकारिक प्रतिशत या लक्ष्य-तिथि सार्वजनिक नहीं
प्रदेश की दूसरी शाखा वाराणसी, 1965 से10

मेरी नज़र में

मेरी नज़र में इस शाखा की असली ताक़त दूरी कम होना है। जब किसी ज़िले में बुख़ार या दस्त के मामले अचानक बढ़ते हैं, तो जल्दी जांच और जल्दी सही जानकारी सबसे काम आती है। निगरानी, जांच और ट्रेनिंग की एक केंद्रीय इकाई प्रदेश की राजधानी में होना इस काम को आसान बना सकता है।

लखनऊ में पहले से जांच का अच्छा आधार है। स्वास्थ्य मंत्रालय की एक सूची में SGPGI को IDSP नेटवर्क की और KGMU को ICMR नेटवर्क की उन लैब में गिना गया है जो इन्फ़्लुएंज़ा वायरस की जांच कर सकती हैं।11 नई शाखा इन संस्थानों के साथ कैसे काम करेगी, यह किसी स्रोत में अभी तय होकर नहीं आया है।

आपके लिए इसका मतलब

  • परिवारों के लिए: यह शाखा इलाज की जगह नहीं होगी। इसका फ़ायदा परोक्ष है: बीमारी फैलने के संकेत जल्दी पकड़ना और जांच की मदद। राज्य सरकार ने ख़ास तौर पर डेंगू, जापानी इंसेफ़ेलाइटिस और चिकनगुनिया का नाम लिया है।3
  • SCR के छह जिलों के लिए: लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी पर इसका कितना सीधा असर होगा, यह शाखा के दायरे पर निर्भर करेगा। वह दायरा आधिकारिक रूप से सामने आना बाकी है। SCR क्या है, यह इस पेज पर है।
  • पढ़ाई और करियर के लिए: NCDC पब्लिक हेल्थ, लैब और कीट-विज्ञान से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग देता है और शोध करता है।6 NCDC के मुताबिक़ 12 आने वाली शाखाओं में स्टाफ़ तैनात हो चुका है।4 लखनऊ शाखा में भर्ती या ट्रेनिंग की कोई सूचना आए, तो उसे सिर्फ़ NCDC या स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर ही देखें।
  • आगे क्या देखें: काम की रफ़्तार अच्छी है; अब लखनऊ शाखा की आधिकारिक लक्ष्य-तिथि का इंतज़ार है। बड़े प्रोजेक्ट की स्थिति इंफ्रा ट्रैकर पर है, और नई ख़बरें ताज़ा अपडेट में।