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दस्तावेज़

RERA कानून 2016 और UP RERA नियमावली: पंजीकरण, ख़रीदार के हक़, शिकायत

RERA कानून 2016 बिक्री के लिए बने ज़्यादातर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और एजेंटों का पंजीकरण ज़रूरी करता है। उत्तर प्रदेश में इसके नियम 27 अक्टूबर 2016 की अधिसूचना से लागू हैं। शिकायत UP RERA पोर्टल पर होती है।

जानकारी जांची गई: | एससीआर टाइम्स

RERA यानी रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016, फ़्लैट, विला और प्लॉट ख़रीदारों की हिफ़ाज़त का केंद्रीय कानून है। यह बिक्री वाले ज़्यादातर प्रोजेक्ट और प्रॉपर्टी एजेंटों का पंजीकरण ज़रूरी करता है। यह बिल्डर पर पैसे, नक्शे और समय-सीमा की ज़िम्मेदारी डालता है और ख़रीदार को शिकायत का तेज़ रास्ता देता है।1 उत्तर प्रदेश ने इसके नियम 27 अक्टूबर 2016 को अधिसूचित किए।2 किसी प्रोजेक्ट का पंजीकरण ख़ुद कैसे जांचें, यह RERA पंजीकरण जांच गाइड में है। इस पेज पर कानून और नियमों का सार है।

एक नज़र में

विषय जानकारी
नाम रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (अधिनियम संख्या 16 सन 2016); उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) नियमावली, 2016
जारी करने वाला अधिनियम: संसद; नियमावली: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, अधिनियम की धारा 84 के तहत2
तारीख़/GO अधिनियम: राष्ट्रपति की मंज़ूरी 25 मार्च 20163; UP नियमावली: अधिसूचना संख्या 1438/आठ-3-16-65 विविध/16, लखनऊ, 27 अक्टूबर 20162
लागू कब से अधिनियम की कुछ धाराएं 1 मई 2016 से; पंजीकरण (धारा 3–19) समेत बाकी धाराएं 1 मई 2017 से3
आधिकारिक लिंक India Code — अधिनियम (PDF); UP RERA नियमावली (PDF); पोर्टल: up-rera.in

किसका पंजीकरण ज़रूरी (धारा 3, 4, 9)

  • पहले पंजीकरण, फिर बिक्री (धारा 3): योजना क्षेत्र में कोई बिल्डर पंजीकरण के बिना प्लॉट, फ़्लैट या इमारत का विज्ञापन, मार्केटिंग या बिक्री नहीं कर सकता।1
  • छूट: ज़मीन 500 वर्ग मीटर तक, या सभी चरण मिलाकर 8 अपार्टमेंट तक; कानून लागू होने से पहले कंप्लीशन सर्टिफ़िकेट पा चुके प्रोजेक्ट; और बिना नई बिक्री वाली मरम्मत या री-डेवलपमेंट।1
  • हर चरण अलग: किसी प्रोजेक्ट के अलग-अलग चरण अलग प्रोजेक्ट माने जाते हैं।1
  • चल रहे प्रोजेक्ट: कानून लागू होते समय जिनका कंप्लीशन सर्टिफ़िकेट नहीं था, उन्हें तीन महीने में आवेदन करना था।1
  • 30 दिन में फ़ैसला (धारा 5): प्राधिकरण 30 दिन में फ़ैसला न करे, तो प्रोजेक्ट पंजीकृत माना जाता है।3
  • 70% अलग खाते में (धारा 4(2)(l)(D)): ख़रीदारों से लिए पैसे का 70% अलग बैंक खाते में रहता है। यह पैसा सिर्फ़ उसी प्रोजेक्ट की ज़मीन और निर्माण पर ख़र्च हो सकता है, और निकासी इंजीनियर, आर्किटेक्ट और CA के प्रमाण पर काम की प्रगति के हिसाब से होती है।1
  • एजेंट (धारा 9): पंजीकृत प्रोजेक्ट की ख़रीद-बिक्री में वही एजेंट मदद कर सकता है जिसका ख़ुद RERA पंजीकरण हो। उसे हर सौदे में अपना पंजीकरण नंबर बताना होता है।1

UP में पंजीकरण फ़ीस (नियम 3): रिहायशी प्रोजेक्ट पर 1,000 वर्ग मीटर तक 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर, उसके बाद हर 100 वर्ग मीटर पर 500 रुपये। कमर्शियल पर यह दोगुना है।2 एजेंट का पंजीकरण व्यक्ति के लिए 25,000 रुपये और कंपनी/फ़र्म के लिए 2,50,000 रुपये है (नियम 9)।2

बिल्डर की ज़िम्मेदारियां (धारा 11–17)

धारा ज़िम्मेदारी
11 प्रोजेक्ट की जानकारी RERA वेबसाइट पर डालना और हर तिमाही बुकिंग व काम की स्थिति अपडेट करना; हर विज्ञापन में RERA वेबसाइट और पंजीकरण नंबर देना
13 पंजीकृत एग्रीमेंट फ़ॉर सेल से पहले क़ीमत का 10% से ज़्यादा एडवांस नहीं
14 मंज़ूर नक्शे के हिसाब से निर्माण; इमारत या कॉमन एरिया में बदलाव के लिए कम से कम दो-तिहाई ख़रीदारों की लिखित सहमति; कब्ज़े के 5 साल तक ढांचागत ख़राबी 30 दिन में ठीक करना
17 पंजीकृत कन्वेयंस डीड करना और कॉमन एरिया का हक़ ख़रीदारों की एसोसिएशन को देना; स्थानीय कानून न हो तो ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट के तीन महीने में

स्रोत: अधिनियम का पाठ।1 UP नियमावली के नियम 14 के मुताबिक़ बिल्डर को हर तिमाही ख़त्म होने के सात दिन में बुकिंग, निर्माण की स्थिति (फ़ोटो सहित) और मंज़ूरियों का अपडेट डालना होता है।2 नक्शे की मंज़ूरी के नियम UP बिल्डिंग बायलॉज़ पेज पर हैं।

ख़रीदार के हक़ और फ़र्ज़ (धारा 18–19)

  • देरी पर (धारा 18): तय तारीख़ पर कब्ज़ा न मिले, तो हटना चाहने वाले ख़रीदार को ब्याज और मुआवज़े के साथ पैसा वापस मिलता है। बने रहने वाले को देरी के हर महीने का ब्याज मिलता है।1 UP में रिफ़ंड देय होने के 45 दिन के भीतर देना होता है (नियम 16)।2
  • जानकारी का हक़ (धारा 19): ख़रीदार मंज़ूर नक्शा, काम का चरणवार शेड्यूल और कब्ज़े के बाद के दस्तावेज़ मांग सकता है।1
  • फ़र्ज़: किस्त समय पर देना, अपने हिस्से के शुल्क और टैक्स देना, ख़रीदारों की एसोसिएशन में शामिल होना, और ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट के दो महीने में कब्ज़ा लेना।1

किस्त का हिसाब EMI कैलकुलेटर से और रजिस्ट्री का ख़र्च स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर से लगाएं।

शिकायत, मुआवज़ा और अपील

  1. शिकायत (धारा 31): कोई भी पीड़ित व्यक्ति, ख़रीदारों की एसोसिएशन या पंजीकृत उपभोक्ता संगठन, प्राधिकरण या अधिनिर्णायक अधिकारी के पास शिकायत कर सकता है।1 प्राधिकरण को 60 दिन में फ़ैसले की कोशिश करनी होती है।3
  2. मुआवज़ा (धारा 71–72): मुआवज़े के मामले अधिनिर्णायक अधिकारी तय करते हैं, जो ज़िला जज हैं या रह चुके हैं। उन्हें 60 दिन में फ़ैसले की कोशिश करनी होती है।1
  3. फ़ीस: UP में प्राधिकरण और अधिनिर्णायक अधिकारी, दोनों के पास शिकायत की फ़ीस 1,000 रुपये है (नियम 33, 34)। ट्रिब्यूनल में अपील की फ़ीस भी 1,000 रुपये है (नियम 25)।2
  4. अपील (धारा 43–44): आदेश मिलने के 60 दिन में रियल एस्टेट अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील। बिल्डर की अपील तभी सुनी जाती है जब वह जुर्माने या ख़रीदार को देय रक़म का कम से कम 30% जमा करे।1 ट्रिब्यूनल के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट जा सकते हैं।3
  5. सिविल कोर्ट नहीं (धारा 79): जिन मामलों को RERA, अधिनिर्णायक अधिकारी या ट्रिब्यूनल तय कर सकते हैं, उन पर सिविल कोर्ट सुनवाई नहीं करता।1

ऑनलाइन शिकायत भरने का तरीका RERA पंजीकरण और शिकायत गाइड में क़दम-दर-क़दम है।

बिना पंजीकरण बिक्री पर सज़ा (धारा 59)

धारा 3 तोड़ने पर बिल्डर पर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 10% तक जुर्माना लग सकता है। आदेश न माने या उल्लंघन जारी रखे, तो तीन साल तक की क़ैद, लागत का 10% तक अतिरिक्त जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।1

SCR के संदर्भ में

लखनऊ SCR के छह जिलों में नई प्लॉटेड कॉलोनियां और प्रोजेक्ट आ रहे हैं। 500 वर्ग मीटर से बड़ी प्लॉटेड कॉलोनी भी RERA के दायरे में आती है। "SCR प्रोजेक्ट" जैसे विज्ञापन सरकारी मंज़ूरी का सबूत नहीं हैं। सबूत वही है जो UP RERA पोर्टल और विकास प्राधिकरण के रिकॉर्ड में दर्ज है।

आपके लिए इसका मतलब

  • बुकिंग से पहले: RERA नंबर लिखवाकर लें और पोर्टल पर मिलाएं। 10% से ज़्यादा पैसा पंजीकृत एग्रीमेंट के बाद ही दें।
  • एजेंट से सौदा: एजेंट का अपना RERA पंजीकरण भी देखें।
  • देरी या ख़राबी: सारी रसीदें, एग्रीमेंट और पत्राचार संभालें। शिकायत में यही काम आते हैं।
  • कब्ज़े के बाद: पांच साल की ढांचागत ख़राबी की ज़िम्मेदारी बिल्डर की है। लिखित में शिकायत करें।

यह पेज कानूनी सलाह नहीं है। किसी ख़ास विवाद में UP RERA, उपभोक्ता मामलों के जानकार या वकील से सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

किस प्रोजेक्ट का RERA पंजीकरण ज़रूरी नहीं है?
धारा 3(2) के मुताबिक़ जिस प्रोजेक्ट की ज़मीन 500 वर्ग मीटर से ज़्यादा न हो, या सभी चरण मिलाकर 8 से ज़्यादा अपार्टमेंट न हों, उसे छूट है। कानून लागू होने से पहले कंप्लीशन सर्टिफ़िकेट पा चुके प्रोजेक्ट और बिना नई बिक्री वाले मरम्मत या री-डेवलपमेंट को भी छूट है।
बिल्डर एग्रीमेंट से पहले कितना एडवांस ले सकता है?
धारा 13 के मुताबिक़ बिल्डर लिखित और पंजीकृत एग्रीमेंट फ़ॉर सेल किए बिना फ़्लैट, प्लॉट या इमारत की क़ीमत का 10% से ज़्यादा एडवांस या आवेदन शुल्क नहीं ले सकता।
कब्ज़े में देरी हो तो क्या मिलता है?
धारा 18 के तहत अगर ख़रीदार प्रोजेक्ट से हटना चाहे, तो उसे ब्याज और मुआवज़े के साथ पैसा वापस मिलता है। प्रोजेक्ट में बने रहना चाहे, तो देरी के हर महीने का ब्याज मिलता है। UP के नियम 16 के मुताबिक़ रिफ़ंड देय होने के 45 दिन में देना होता है।
UP RERA में शिकायत की फ़ीस कितनी है?
UP RERA नियमावली 2016 के नियम 33 और 34 में प्राधिकरण और अधिनिर्णायक अधिकारी, दोनों के पास शिकायत की फ़ीस 1,000 रुपये है। शिकायत भरते समय पोर्टल पर दिखी रक़म और भुगतान का तरीका ही मानें।
कब्ज़े के बाद ढांचे में ख़राबी निकले तो?
धारा 14(3) के मुताबिक़ कब्ज़े के पांच साल के भीतर बताई गई ढांचागत ख़राबी या घटिया काम को बिल्डर 30 दिन में ठीक करेगा। ऐसा न हो तो ख़रीदार मुआवज़े का हक़दार है।