तहसील

डलमऊ तहसील, रायबरेली — गंगा किनारा, कार्तिक मेला, आबादी और ब्लॉक

डलमऊ गंगा के ऊंचे किनारे पर बसा पुराना क़स्बा है। आबादी में यह रायबरेली की सबसे छोटी तहसील है, पर कार्तिक पूर्णिमा का इसका मेला पूरे जिले में सबसे बड़ा माना जाता है।

जानकारी जांची गई:

डलमऊ तहसील रायबरेली जिले के दक्षिण में गंगा के किनारे है। गंगा यहां जिले की दक्षिणी सीमा बनाती है और इसे फ़तेहपुर जिले से अलग करती है।1 जनगणना 2011 में तहसील की आबादी 2,92,749 थी। आबादी के हिसाब से यह जिले की सबसे छोटी तहसील है।2

एक नज़र में

क्या जानकारी (जनगणना 2011)
आबादी 2,92,749 (पुरुष 1,50,522; महिला 1,42,227)2
लिंगानुपात 1,000 पुरुषों पर 945 महिलाएं2
साक्षर लोग 1,75,345 — 7 साल से ऊपर की आबादी में करीब 69.3%2
परिवार 54,2722
क्षेत्रफल करीब 429 वर्ग किमी (गांव 420.19, शहर 8.38)2
शहरी आबादी 9,983 — डलमऊ नगर पंचायत23
ब्लॉक डलमऊ, जगतपुर, रोहनिया1

तहसील की 97% के करीब आबादी गांवों में रहती है।2 डलमऊ ब्लॉक में ही 124 गांव हैं।4

गंगा किनारे का पुराना क़स्बा

डलमऊ गंगा के ऊंचे, खड़े किनारे पर बसा है। इसी ऊंचाई की वजह से क़स्बा बाढ़ से बचा रहता है।4

  • किला: करीब 8 एकड़ के ऊंचे टीले पर पुराने किले के खंडहर हैं, जहां से गंगा दिखती है। 1400 के दशक की शुरुआत में इब्राहीम शाह शर्की ने इसे दोबारा बनवाया था।4
  • घाट: राजा टिकैत राय का बनवाया पक्का घाट और मुग़ल दौर का ज़नाना घाट।4
  • मंदिर और मठ: रानी का शिवाला, बड़ा मठ और महेश गिरि मठ। दरगाहें और हाजी ज़ाहिद मस्जिद भी यहीं हैं।4
  • नाम की कहानी: एक परंपरा क़स्बे को डल देव से जोड़ती है, जिन्हें बल देव का भाई बताया जाता है।4

कार्तिक पूर्णिमा का मेला

कार्तिक महीने के आख़िरी दिन डलमऊ में गंगा स्नान का मेला लगता है। यह तीन दिन चलता है और जिले का सबसे बड़ा मेला माना जाता है।4 जाने से पहले जिला प्रशासन की ओर से जारी रूट और पार्किंग की जानकारी देख लें।

उद्योग और सड़क

MSME विभाग की जिला प्रोफ़ाइल में पखरौली (डलमऊ) में जिला उद्योग केंद्र का 3.33 एकड़ का मिनी इंडस्ट्रियल एस्टेट दर्ज है।1 रायबरेली शहर से डलमऊ जाने वाली सड़क पर मुंशीगंज में AIIMS रायबरेली है।5 इसकी पूरी जानकारी रायबरेली जिला पेज पर है।

आपके लिए इसका मतलब

  • घूमने वालों के लिए: गंगा घाट, किले के खंडहर और कार्तिक मेला डलमऊ को एक दिन की सैर लायक बनाते हैं। गंगा के दूसरे बड़े ठिकाने के लिए ऊंचाहार पेज भी देखें।
  • खेती से जुड़े लोगों के लिए: ज़्यादातर आबादी गांवों में है, इसलिए खसरा-खतौनी और ज़मीन के नाप सबसे ज़्यादा काम की चीज़ें हैं। नाप बदलने के लिए ज़मीन नाप कन्वर्टर देखें।
  • ज़मीन या मकान लेने से पहले: सर्किल रेट और रजिस्ट्री का ख़र्च ख़ुद जांचें। स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर से हिसाब लगाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डलमऊ तहसील में कौन-कौन से ब्लॉक हैं?
जिला उद्योग प्रोफ़ाइल के मुताबिक़ डलमऊ तहसील में तीन ब्लॉक हैं: डलमऊ, जगतपुर और रोहनिया। अकेले डलमऊ ब्लॉक में जनगणना 2011 के हिसाब से 124 गांव हैं।
डलमऊ का मेला कब लगता है?
डलमऊ में कार्तिक महीने के आख़िरी दिन, यानी कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का मेला लगता है। यह तीन दिन चलता है और जिले का सबसे बड़ा मेला माना जाता है।
डलमऊ तहसील की आबादी कितनी है?
जनगणना 2011 में डलमऊ तहसील की आबादी 2,92,749 थी। इसमें 1,50,522 पुरुष और 1,42,227 महिलाएं थीं। डलमऊ नगर पंचायत में 9,983 लोग रहते थे।
डलमऊ में देखने लायक क्या है?
गंगा के ऊंचे किनारे पर पुराने किले के खंडहर, राजा टिकैत राय का बनवाया पक्का घाट, ज़नाना घाट, रानी का शिवाला और बड़ा मठ जैसी जगहें हैं।