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सर्किल रेट क्या है — UP में कहां देखें और रजिस्ट्री पर इसका असर

सर्किल रेट वह न्यूनतम सरकारी दर है, जिस पर किसी इलाके की ज़मीन या मकान का मूल्य आंका जाता है। उत्तर प्रदेश में इसे जिले के कलेक्टर (जिलाधिकारी) तय करते हैं। रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी सौदे की रक़म और सर्किल रेट से निकले मूल्य में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है।

जानकारी जांची गई:

सर्किल रेट किसी इलाके की ज़मीन, निर्माण या किराये की वह न्यूनतम दर है, जो जिले के कलेक्टर तय करते हैं। सरकारी भाषा में इसे "न्यूनतम मूल्य" या "मूल्यांकन सूची की दर" कहा जाता है।1 रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी सौदे की रक़म और सर्किल रेट से निकले मूल्य में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है।2 इसलिए किसी भी सौदे से पहले सर्किल रेट जानना ज़रूरी है।

सर्किल रेट कौन और कैसे तय करता है

इसका आधार उत्तर प्रदेश स्टांप (संपत्ति का मूल्यांकन) नियमावली, 1997 का नियम 4 है:1

  • कौन: जिले के कलेक्टर।
  • कब: हर दो साल में, जहां तक संभव हो अगस्त में।
  • किसकी दर: खेती और गैर-खेती ज़मीन की दर (प्रति एकड़ या प्रति वर्ग मीटर), गैर-व्यावसायिक इमारत के निर्माण की दर (प्रति वर्ग मीटर), और व्यावसायिक इमारत का न्यूनतम मासिक किराया (प्रति वर्ग मीटर)।
  • किन बातों पर: ज़मीन के लिए मिट्टी, सिंचाई, और सड़क, बाज़ार, परिवहन, फ़ैक्ट्री, स्कूल, अस्पताल व सरकारी दफ़्तरों से नज़दीकी; इलाका शहरी, अर्ध-शहरी या ग्रामीण है। इमारत के लिए सामग्री और मज़दूरी की लागत, निर्माण का प्रकार और उम्र। व्यावसायिक इमारत के लिए इलाके का किराया।
  • सूचना: कलेक्टर की सूची रजिस्ट्रार के ज़रिए हर उप-निबंधक तक जाती है, और रजिस्ट्री दफ़्तर के बाहर नोटिस बोर्ड पर लगती है।
  • सुधार: कलेक्टर को लगे कि कोई दर ग़लत है, तो वे लिखित कारण के साथ तय करने के दो साल के भीतर उसे बदल सकते हैं।

सर्किल रेट कहां देखें: क़दम-दर-क़दम

  1. IGRS UP की वेबसाइट (igrsup.gov.in) खोलें।
  2. ऊपर के मेन्यू में मूल्यांकन सूची पर क्लिक करें।3
  3. जनपद चुनें, फिर उप निबंधक कार्यालय चुनें।4
  4. कैप्चा भरें और सूची खोलें।4
  5. सूची में अपना मोहल्ला, गांव या सड़क खोजें। ज़मीन, निर्माण और व्यावसायिक दर अलग-अलग हिस्सों में होती हैं।1

अगर पता न हो कि आपकी संपत्ति किस उप-निबंधक कार्यालय में आती है, तो IGRS पर अपना कार्यालय जानें विकल्प है।3 सरकारी जानकारी के मुताबिक़ सभी जिलों की दर-सूचियां विभाग की वेबसाइट और जिले की NIC वेबसाइट पर भी डाली जाती हैं।2

मूल्य कैसे निकालें

सर्किल रेट से संपत्ति का मूल्य निकालने का तरीका सीधा है: तय दर × ज़मीन या निर्मित क्षेत्र का क्षेत्रफल।2 मूल्यांकन उसी दर से होता है जो दस्तावेज़ पर दस्तख़त (निष्पादन) की तारीख़ को लागू हो।2

उदाहरण (काल्पनिक दरें):

स्थिति हिसाब
प्लॉट 150 वर्ग मीटर, सर्किल रेट ₹30,000 प्रति वर्ग मीटर सर्किल मूल्य = ₹45,00,000
सौदे की रक़म ₹40,00,000 ड्यूटी ₹45,00,000 पर लगेगी (क्योंकि यह ज़्यादा है)
सौदे की रक़म ₹50,00,000 ड्यूटी ₹50,00,000 पर लगेगी

इस मूल्य पर कितनी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस बनेगी, यह स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री फ़ीस पेज पर है। तुरंत अनुमान के लिए स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर में दोनों रक़में डालें।

रजिस्ट्री में दस्तावेज़ पर ये बातें भी लिखनी होती हैं: खेती की ज़मीन के लिए खसरा नंबर, क्षेत्रफल, सिंचाई और मिट्टी का प्रकार; गैर-खेती ज़मीन के लिए वर्ग मीटर में क्षेत्रफल; इमारत के लिए कवर्ड और खुला क्षेत्र, मंज़िलें, निर्माण का प्रकार और साल। हर मामले में कलेक्टर की तय न्यूनतम दर भी लिखनी होती है।1

लखनऊ में हाल के बदलाव

  • 1 अगस्त 2025: लखनऊ में संशोधित सर्किल रेट लागू हुए। यह 2015 के बाद पहला बड़ा संशोधन था। खेती की ज़मीन की दर 15% और गैर-खेती आवासीय ज़मीन की दर 20–25% बढ़ी।5
  • फ़्लैट की दो श्रेणियां: इसी संशोधन में फ़्लैट "प्रीमियम" और "साधारण" में बांटे गए। स्विमिंग पूल, क्लब, जिम या सेगमेंट रोड में से कोई दो सुविधाएं हों तो प्रीमियम माना गया।5
  • जून 2026: जिला प्रशासन ने 58 आपत्तियों के निपटारे के बाद 332 गांवों में खेती की ज़मीन के सर्किल रेट बदले। ये गांव मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, बीकेटी, मलिहाबाद और सदर तहसील में हैं।6 इससे पहले जून 2026 की शुरुआत में कुछ गांवों के प्रस्तावित रेट पर ख़बरें आई थीं।7
  • खेती की ज़मीन की चार श्रेणियां: जिला सड़क के किनारे, संपर्क मार्ग से जुड़ी, आबादी से सटी, और सामान्य कृषि भूमि। हर श्रेणी की दर अलग है।6

SCR के बाकी जिलों (हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी) की ताज़ा दरें उसी तरीके से IGRS की मूल्यांकन सूची में जनपद चुनकर देखी जा सकती हैं। जिलों की जानकारी SCR के जिले पेज पर है।

आपके लिए इसका मतलब

  • खरीदार: सौदे की रक़म सर्किल मूल्य से कम हो, तब भी ड्यूटी सर्किल मूल्य पर देनी होगी। बजट उसी हिसाब से बनाएं।
  • जिनकी ज़मीन किसी प्रोजेक्ट के पास है: सर्किल रेट बढ़ना सरकारी दर में बदलाव है, बाज़ार भाव की गारंटी नहीं। इसे ज़मीन के दाम का अनुमान न मानें।
  • फ़्लैट खरीदने वाले: आपका फ़्लैट प्रीमियम श्रेणी में है या साधारण, इससे ड्यूटी बदल सकती है। सुविधाओं की सूची रजिस्ट्री से पहले साफ़ कर लें।
  • दस्तावेज़ बनाने वाले: निष्पादन की तारीख़ की दर लागू होती है। संशोधन की ख़बर हो तो तारीख़ का ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अपने इलाके का सर्किल रेट ऑनलाइन कैसे देखें?
IGRS UP की वेबसाइट पर मूल्यांकन सूची खोलें, जनपद और उप-निबंधक कार्यालय चुनें, कैप्चा भरें और सूची देखें। उप-निबंधक कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी सूची लगती है।
अगर सौदे की रक़म सर्किल रेट से कम हो तो क्या होगा?
स्टांप ड्यूटी सर्किल रेट से निकले मूल्य पर ही लगेगी, क्योंकि दोनों में जो ज़्यादा हो उसी पर ड्यूटी बनती है। उदाहरण नीचे पेज पर है, और अनुमान के लिए स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर देखें।
लखनऊ में सर्किल रेट आख़िरी बार कब बदले?
1 अगस्त 2025 से लखनऊ में नए सर्किल रेट लागू हुए, जो 2015 के बाद पहला बड़ा बदलाव था। जून 2026 में जिला प्रशासन ने आपत्तियों के निपटारे के बाद 332 गांवों में खेती की ज़मीन के सर्किल रेट बदले।
सर्किल रेट कितने समय में बदलता है?
UP स्टांप (संपत्ति का मूल्यांकन) नियमावली 1997 के नियम 4 के मुताबिक़ कलेक्टर हर दो साल में, जहां तक संभव हो अगस्त में, दरें तय करते हैं। लखनऊ में 2015 के बाद अगला बड़ा बदलाव 2025 में हुआ।
क्या सर्किल रेट बाज़ार भाव के बराबर होता है?
नहीं। सर्किल रेट सरकारी न्यूनतम दर है, जिसे सड़क, बाज़ार, स्कूल, अस्पताल से दूरी और इलाके के प्रकार जैसे आधारों पर तय किया जाता है। बाज़ार में सौदा इससे ऊपर या नीचे हो सकता है, पर ड्यूटी कम से कम सर्किल रेट वाले मूल्य पर लगती है।