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बेस मैप, रीजनल प्लान, मास्टर प्लान — तीनों में फ़र्क, और ज़मीन लेने से पहले क्या देखें

जानकारी जांची गई: | प्रकाशित: | एससीआर टाइम्स

कॉलम3 दस्तावेज़बेस मैप · रीजनल प्लान · मास्टर प्लानSCR Times · एससीआर टाइम्स

सितंबर में लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) का बेस मैप मंज़ूर हुआ। तब से तीन शब्द बार-बार सुनाई दे रहे हैं: बेस मैप, रीजनल प्लान और मास्टर प्लान। कई लोग इन्हें एक ही चीज़ मान लेते हैं। कुछ लोग इसी उलझन का फ़ायदा उठाकर ज़मीन भी बेच रहे हैं। इसलिए आज की बात सीधी है: इन तीनों में से आज सिर्फ़ मास्टर प्लान लागू है। बेस मैप सिर्फ़ मौजूदा हालत का नक्शा है, और रीजनल प्लान अभी बना ही नहीं है।

तीन परतें, एक के ऊपर एक

इन्हें समझने का आसान तरीका है कि इन्हें तीन परतें मानें।

पहली परत बेस मैप है। यह इलाके की आज की तस्वीर है: कहां सड़क है, कहां गांव और कस्बे हैं, कहां खेत, जंगल और नदी है।3 यह नहीं बताता कि आगे कहां क्या बनेगा।

दूसरी परत रीजनल प्लान है। यह छहों जिलों का बड़ा खाका होगा। कौन सा इलाका किस काम के लिए होगा, बड़ी सड़कें, रेल और मेट्रो कहां से जाएंगी, औद्योगिक इलाके कहां होंगे — यह सब इसी में तय होगा।1

तीसरी परत मास्टर प्लान है। यह किसी एक शहर के विकास क्षेत्र का विस्तृत नक्शा है। यही बताता है कि किसी मोहल्ले की ज़मीन रिहायश, दुकान, उद्योग, पार्क या खेती में से किस उपयोग के लिए है।4

मेरी नज़र में सबसे आसान याद रखने वाली बात यह है: बेस मैप "अभी" का नक्शा है, बाकी दोनों "आगे" के।

बेस मैप: नींव, फ़ैसला नहीं

SCR के बेस मैप को 8 सितंबर 2026 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में हुई समीक्षा समिति की बैठक में मंज़ूरी मिली। अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त ने की।2 यह मैप छहों जिलों — लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली — के करीब 26,741 वर्ग किमी को कवर करता है।23

इसे बनाने से पहले 22 विभागों और संस्थाओं की सहमति ली गई। छहों जिलों में 2,239 जगहों पर जाकर सैटेलाइट तस्वीरों और नक्शे का मिलान हुआ।23 अगला क़दम यह है कि मैप SCR की कार्यकारी समिति के पास जाएगा। उसके बाद रीजनल प्लान का काम आगे बढ़ेगा।23

ध्यान देने वाली बात यह है कि SCR कानून में "बेस मैप" नाम का कोई अलग दस्तावेज़ नहीं है। कानून कहता है कि रीजनल प्लान एक लिखित दस्तावेज़ होगा, जिसके साथ नक्शे और डायग्राम होंगे।1 बेस मैप उन्हीं नक्शों की पहली परत है। इसलिए बेस मैप में आपका गांव दिखना किसी योजना का सबूत नहीं है। वह सिर्फ़ यह बताता है कि आपका गांव वहां है। इसकी पूरी जानकारी SCR बेस मैप गाइड में है।

रीजनल प्लान: सबसे ऊपर का दस्तावेज़, पर अभी बाकी

रीजनल प्लान का आधार SCR अधिनियम, 2024 है। कानून की धारा 2 इसे पूरे क्षेत्र के विकास या पुनर्विकास का प्लान बताती है।1 इसके नीचे दो और तरह के प्लान होंगे। फ़ंक्शनल प्लान रीजनल प्लान के किसी हिस्से, जैसे परिवहन, को विस्तार से बताएगा। प्रोजेक्ट प्लान उसके किसी हिस्से को ज़मीन पर उतारने का विस्तृत खाका होगा।1

LDA इस प्लान को GIS तकनीक से 2051 तक की समय-सीमा के लिए तैयार कर रहा है।7

कानून इसकी प्रक्रिया भी तय करता है:1

  1. प्राधिकरण अपनी कार्यकारी समिति के साथ ड्राफ्ट बनाएगा।
  2. ड्राफ्ट की प्रति देखने के लिए रखी जाएगी, और नोटिस छापकर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। स्थानीय निकायों को भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।
  3. आपत्तियों पर विचार के बाद अंतिम प्लान की सूचना छपेगी, जिसमें लिखा होगा कि प्लान कहां देखा जा सकता है।
  4. अंतिम प्लान की हर 10 साल में कम से कम एक बार पूरी समीक्षा होगी।

सबसे अहम बात धारा 36 में है। अंतिम रीजनल प्लान छपने के बाद उससे टकराने वाली कोई विकास योजना नहीं बन सकेगी।1 यानी जब रीजनल प्लान आएगा, तो वह शहरों के मास्टर प्लान से ऊपर होगा। पर जब तक ड्राफ्ट तक नहीं आया, उसकी किसी "ज़ोनिंग" का दावा सिर्फ़ दावा है। प्रक्रिया को विस्तार से रीजनल प्लान गाइड में पढ़ें।

मास्टर प्लान: आज का कानूनी नक्शा

अब वह दस्तावेज़ जो आज सचमुच लागू है। उत्तर प्रदेश में मास्टर प्लान उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 के तहत बनता है। यह विकास क्षेत्र को ज़ोन में बांटता है और बताता है कि हर ज़ोन की ज़मीन किस काम में आएगी।4

इस कानून की तीन बातें हर ख़रीदार को पता होनी चाहिए:4

  • ड्राफ्ट पर आपत्ति का हक़। मास्टर प्लान का ड्राफ्ट छपता है और कोई भी व्यक्ति तय तारीख़ तक आपत्ति या सुझाव दे सकता है।
  • बदलाव से पहले अख़बार में सूचना। भू-उपयोग बदलने से पहले कम से कम एक स्थानीय अख़बार में सूचना छपनी ज़रूरी है।
  • निर्माण सिर्फ़ अनुमति से। विकास क्षेत्र में कोई भी निर्माण प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की लिखित अनुमति से ही हो सकता है, और वह मास्टर प्लान के मुताबिक़ होना चाहिए। यह नियम सरकारी विभागों पर भी लागू है।

लखनऊ में अभी मास्टर प्लान 2031 लागू है। LDA बोर्ड ने इसे 24 अक्टूबर 2016 को और राज्य सरकार ने 19 दिसंबर 2016 को मंज़ूरी दी थी।5 यह करीब 1,05,125 हेक्टेयर इलाके को कवर करता है, जिसमें से करीब 71,220 हेक्टेयर शहरी विकास के लिए प्रस्तावित है।5 पूरी जानकारी मास्टर प्लान गाइड में है।

SCR बनने से मास्टर प्लान ख़त्म नहीं होता। कानून की धारा 9 SCR प्राधिकरण को क्षेत्र के विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान मंज़ूर करने और बदलने के वे अधिकार देती है, जो पहले राज्य सरकार के पास थे।1 मतलब यह कि मौजूदा मास्टर प्लान चलता रहेगा, पर आगे के मास्टर प्लान रीजनल प्लान के ढांचे में बनेंगे। यह ढांचा कैसे काम करेगा, यह मैंने SCR प्राधिकरण कैसे काम करता है में समझाया था।

एक नज़र में

बेस मैप रीजनल प्लान मास्टर प्लान
क्या बताता है आज ज़मीन पर क्या है छह जिलों में आगे क्या होगा शहर के हर इलाके का भू-उपयोग
दायरा पूरा SCR पूरा SCR एक शहर / विकास क्षेत्र
कानून SCR अधिनियम 2024 के तहत प्लानिंग का पहला चरण SCR अधिनियम 2024 नगर योजना अधिनियम 1973
आज की स्थिति 8 सितंबर 2026 को मंज़ूर ड्राफ्ट आना बाकी लखनऊ में मास्टर प्लान 2031 लागू
ज़मीन के सौदे पर असर कोई नहीं ड्राफ्ट और अंतिम प्लान आने पर आज सीधा असर

आपके लिए इसका मतलब

घर या प्लॉट ख़रीदने वाले। आज के सौदे के लिए मास्टर प्लान ही वह दस्तावेज़ है जिस पर भरोसा किया जा सकता है। लखनऊ में LDA की वेबसाइट पर "Know Your Land Use" सेवा, मास्टर प्लान का नक्शा और GIS पोर्टल मौजूद हैं।6 PDF नक्शे में प्लॉट नंबर नहीं होते, इसलिए बड़े सौदे से पहले प्राधिकरण से लिखित पुष्टि लें। तरीका भू-उपयोग और ज़ोनिंग गाइड में है।

"SCR हब" वाले दावे सुनें तो। कोई कहे कि "यह इलाका रीजनल प्लान में कमर्शियल ज़ोन है" या "बेस मैप में आ गया, अब दाम बढ़ेंगे", तो याद रखें कि रीजनल प्लान का ड्राफ्ट अभी आया ही नहीं है। ऐसे दावे का कोई सरकारी आधार नहीं है।

ज़मीन के कागज़ अलग चीज़ हैं। मास्टर प्लान बताता है कि ज़मीन पर क्या बन सकता है। मालिक कौन है, यह खतौनी और खसरा बताते हैं। दोनों देखें — खतौनी-खसरा गाइड मदद करेगा। किसी बिल्डर के प्रोजेक्ट में फ़्लैट ले रहे हैं, तो RERA पंजीकरण भी जांचें।

किसान, पंचायत और नगर निकाय। रीजनल प्लान का ड्राफ्ट आने पर आपत्ति देने का मौका कानून देता है।1 उस समय अपने गांव या वार्ड का प्रस्तावित उपयोग ध्यान से देखिए। ग़लत दर्ज सड़क, तालाब या सरकारी ज़मीन पर आपत्ति वहीं दर्ज होगी।

एससीआर टाइम्स ड्राफ्ट रीजनल प्लान आते ही उसे आसान भाषा में समझाएगा। तब तक SCR की बुनियादी जानकारी SCR क्या है पेज पर, और प्रोजेक्ट की स्थिति इंफ्रा ट्रैकर पर देखते रहिए।