कॉलम

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे: आगरा–लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली सड़क कहां तक पहुंची

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लखनऊ के पास दो बड़े एक्सप्रेसवे ख़त्म होते हैं, पर आपस में मिलते नहीं। पश्चिम से आने वाला आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे मोहान रोड पर रुक जाता है। पूरब जाने वाला पूर्वांचल एक्सप्रेसवे सुल्तानपुर रोड के चांद सराय से शुरू होता है। बीच का सफ़र शहर की सड़कों से तय होता है। इसी कमी को भरने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) करीब 51 किमी का नया लिंक एक्सप्रेसवे बनाने जा रहा है। सीधी बात यह है कि प्रोजेक्ट को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल चुकी है और टेंडर निकल चुका है, पर 20 अक्टूबर 2026 तक इसका निर्माण शुरू होने की कोई आधिकारिक सूचना हमें नहीं मिली।

अब तक क्या-क्या हुआ

यह विचार नया नहीं है। नवंबर 2023 में UPEIDA ने इस लिंक की फ़िज़िबिलिटी जांचने, रूट तय करने और DPR बनाने के लिए कंसल्टेंट का टेंडर निकाला था।1 मई 2025 में यह राज्य के नौ प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की सूची में "लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे" के नाम से शामिल था।2

पहली बड़ी मंज़ूरी 3 जुलाई 2025 को मिली। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट ने 4,775.84 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी। पूरा ख़र्च राज्य सरकार उठाएगी और काम EPC मॉडल पर होगा।3

फिर 18 फ़रवरी 2026 की तारीख़ वाला टेंडर नोटिस आया। UPEIDA ने इस लिंक एक्सप्रेसवे के लिए ठेकेदारों से तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव मांगे।4 मार्च 2026 की ख़बरों में टेंडर की लंबाई 50.94 किमी बताई गई।56

21 जुलाई 2026 को कैबिनेट ने इस लिंक का संशोधित और अंतिम RFP (रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोज़ल) मंज़ूर किया। साथ में यह भी तय हुआ कि चुनी गई एजेंसी करीब 36 महीने में निर्माण पूरा करेगी और उसके बाद पांच साल तक सड़क का रखरखाव करेगी।78

ठेका किस कंपनी को मिला, इसकी आधिकारिक घोषणा हमें UPEIDA की साइट या किसी सरकारी विज्ञप्ति में नहीं मिली। इसलिए इस कॉलम में किसी कंपनी का नाम नहीं दिया गया है।

एक नज़र में

क्या जानकारी
नाम आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक (ख़बरों में "लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे")24
किस तरह की सड़क ग्रीनफ़ील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड, 6 लेन; आगे 8 लेन तक बढ़ाने की गुंजाइश37
लंबाई 49.96 किमी (जुलाई 2025 की मंज़ूरी)3; 50.94 किमी (टेंडर की ख़बरें, मार्च 2026)5; 50.98 किमी (जुलाई 2026 की मंज़ूरी)78
शुरुआत आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे का किमी 294, जलियामऊ के पास5
अंत पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का किमी 6, रतिया मऊ के पास5
लागत प्रोजेक्ट लागत 4,775.84 करोड़ रुपये37; टेंडर की ख़बरों में 2,864.82 करोड़ रुपये56
पैसा पूरा ख़र्च राज्य सरकार का3
बनाने वाली संस्था UPEIDA, EPC मॉडल34
समय-सीमा एजेंसी चुने जाने के बाद करीब 36 महीने में निर्माण, फिर 5 साल रखरखाव78
स्थिति प्रक्रिया में — टेंडर निकला, अंतिम RFP मंज़ूर; निर्माण शुरू होने की आधिकारिक सूचना नहीं

लागत के दो आंकड़ों पर एक बात साफ़ कर दूं। 4,775.84 करोड़ रुपये कैबिनेट से मंज़ूर पूरे प्रोजेक्ट की लागत है। 2,864.82 करोड़ रुपये का आंकड़ा टेंडर के समय की ख़बरों में आया। स्रोतों ने यह नहीं बताया कि दूसरे आंकड़े में क्या-क्या शामिल है, इसलिए हम दोनों को अलग-अलग ही रख रहे हैं।

रूट: शहर के बाहर से, दक्षिण की ओर

आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे कुल 302 किमी का है।9 लिंक उसके किमी 294 से निकलेगा, यानी लखनऊ वाले सिरे से करीब 8 किमी पहले। दूसरी ओर यह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किमी 6 पर, यानी चांद सराय से करीब 6 किमी आगे मिलेगा।5 यह पूरी तरह नई ज़मीन पर बनेगा और लखनऊ के दक्षिणी हिस्से से गुज़रेगा।610

जुलाई 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इसके लिए करीब 597 हेक्टेयर ज़मीन लगनी है। यह ज़मीन लखनऊ जिले की सदर, सरोजनीनगर और मोहनलालगंज तहसीलों के 39 गांवों में बताई गई थी।11 पर जून 2026 की एक दूसरी रिपोर्ट में लखनऊ के 16 और उन्नाव के 27 गांवों की बात है।12 गांवों की आधिकारिक सूची हमें UPEIDA की साइट पर नहीं मिली। इसलिए अभी यह मानकर न चलें कि कौन सा गांव रूट पर है और कौन सा नहीं।

यह सड़क क्यों ज़रूरी है

आज आगरा या दिल्ली से आकर आज़मगढ़, मऊ या गाज़ीपुर जाने वाला ट्रक लखनऊ के भीतर या उसके किनारे की सड़कों से गुज़रता है। रिपोर्टों के मुताबिक़ लिंक बनने के बाद भारी गाड़ियों को अवध चौराहा, तेलीबाग, अर्जुनगंज और गोसाईंगंज जैसे भीड़ वाले इलाकों से होकर नहीं जाना पड़ेगा।11 लंबी दूरी की गाड़ियां लखनऊ शहर में घुसे बिना पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल पहुंच सकेंगी।5

बड़ी तस्वीर में यह कड़ी दिल्ली–NCR को आगरा–लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते पूर्वी यूपी और आगे बिहार की सीमा तक बिना रुकावट जोड़ती है।1 पश्चिम और पूरब के बीच अभी जो "टूटा हुआ हिस्सा" लखनऊ में है, वह भर जाएगा।

मेरी नज़र में इसे किसान पथ (आउटर रिंग रोड) के साथ मिलाकर देखना चाहिए। किसान पथ शहर के चारों ओर का घेरा है, जिस पर शहर का अपना ट्रैफ़िक भी चलता है। लिंक एक्सप्रेसवे एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा, यानी उस पर लंबी दूरी की गाड़ियां तेज़ और बिना रुकावट चलेंगी। दोनों मिलकर शहर के भीतर के बोझ को अलग-अलग तरह से कम कर सकते हैं। SCR के इंफ्रा ट्रैकर पर हम इन सब प्रोजेक्ट की स्थिति एक साथ रखते हैं।

लोगों के लिए इसका असर

आने-जाने पर। सबसे सीधा फ़ायदा उन लोगों को होगा जो पश्चिम और पूरब के बीच सफ़र करते हैं। आगरा, कानपुर या दिल्ली से अयोध्या, सुल्तानपुर या आज़मगढ़ की ओर जाने वालों को शहर का जाम नहीं झेलना होगा। लखनऊ के भीतर रहने वालों को भी अप्रत्यक्ष फ़ायदा है: शहर की सड़कों से भारी ट्रक कम होंगे। सरकारी समय-सीमा देखें तो यह फ़ायदा निर्माण शुरू होने के करीब तीन साल बाद ही मिलेगा।7

कारोबार पर। माल ढुलाई करने वालों के लिए शहर से बचकर निकलने का मतलब है समय और ईंधन की बचत। पश्चिमी यूपी के कारखानों और पूर्वांचल के बाज़ारों के बीच सामान की आवाजाही आसान होगी। इस लिंक पर टोल दरों की कोई आधिकारिक घोषणा हमें नहीं मिली।

नौकरी पर। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक़ कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट से सीधे और अप्रत्यक्ष रोज़गार की उम्मीद जताई है।3 निर्माण के दौरान मज़दूरों, ड्राइवरों, मशीन ऑपरेटरों और इंजीनियरों की ज़रूरत पड़ेगी। ऐसी भर्तियां आमतौर पर निर्माण करने वाली एजेंसी करती है, इसलिए एजेंसी तय होने के बाद ही इसकी असली तस्वीर साफ़ होगी।

खेती और ज़मीन पर। जिन गांवों से सड़क गुज़रेगी, वहां के किसानों के लिए ज़मीन ख़रीद सबसे बड़ा मुद्दा है। जून 2026 की एक रिपोर्ट में करीब 4,000 किसानों की ज़मीन लेने और करीब 3,000 किसानों के सहमति पत्र देने की बात कही गई।12 ज़मीन ख़रीद कितनी पूरी हुई, इसका ताज़ा आधिकारिक आंकड़ा हमें नहीं मिला।

आपके लिए इसका मतलब

  • सफ़र की योजना: अभी यह सड़क काग़ज़ और टेंडर के स्तर पर है। आने वाले करीब तीन साल तक पूरब-पश्चिम का सफ़र आज वाले रास्तों से ही होगा।
  • रूट के नक्शों से सावधान: UPEIDA की साइट पर रूट का आधिकारिक नक्शा हमें नहीं मिला। इसलिए किसी अनौपचारिक "फ़ाइनल रूट" वाले नक्शे पर भरोसा न करें। लंबाई और गांवों के आंकड़े ख़ुद अलग-अलग स्रोतों में अलग हैं। किसी गांव या प्लॉट के रूट पर होने का दावा UPEIDA या अपनी तहसील से ही पक्का करें।
  • ज़मीन के कागज़ात: अगर आपकी ज़मीन संभावित इलाके में है, तो खतौनी और खसरा अपडेट रखें। ज़मीन के उपयोग से जुड़े नियम समझने के लिए लैंड यूज़ और ज़ोनिंग वाला पेज देखें।
  • कारोबार की योजना: किसी "एक्सप्रेसवे के पास औद्योगिक इलाके" के दावे पर तभी भरोसा करें, जब वह UPEIDA या निवेश मित्र जैसे सरकारी पोर्टल पर दर्ज हो।

SCR Times इस प्रोजेक्ट पर नज़र रखेगा। ठेका दिए जाने, ज़मीन ख़रीद या निर्माण शुरू होने की पुष्ट जानकारी मिलते ही हम इसे अपडेट करेंगे। आगरा–लखनऊ और पूर्वांचल, दोनों एक्सप्रेसवे का पूरा ब्योरा उनके अपने पेजों पर है, और रास्ते नक्शे पर SCR नक्शा में देखे जा सकते हैं।

स्रोत

  1. Greenfield Corridor To Connect Agra-Lucknow Expressway And Purvanchal Expressway In The Works — India Infra Hub, 17 नवंबर 2023
  2. यूपी में बनेंगे नौ नए एक्सप्रेसवे, जानें किन जिलों से गुज़रेंगे — अमर उजाला, 26 मई 2025
  3. UP cabinet approves Rs 4,775 crore expressway connecting Agra-Lucknow and Purvanchal — PTI / The Week, 3 जुलाई 2025
  4. ई-टेंडर सूची: Agra Lucknow Expressway to Purvanchal Expressway Link, टेंडर ID 2026_UPEID_1117415_1, दिनांक 18.02.2026 — UPEIDA (आधिकारिक)
  5. लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे को मिली रफ़्तार: 2864 करोड़ की परियोजना — पत्रिका, 3 मार्च 2026
  6. New 6-lane Lucknow Link Expressway to connect Purvanchal to Delhi — India TV, 6 मार्च 2026
  7. UP Cabinet: चार नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को मिली मंज़ूरी — अमर उजाला, 21 जुलाई 2026
  8. UP cabinet approves four expressway projects — PTI / ThePrint, 21 जुलाई 2026
  9. Agra – Lucknow Expressway — UPEIDA (आधिकारिक)
  10. Agra Lucknow Expressway to Purvanchal Expressway ‘Link Expressway’ — The Metro Rail Guy
  11. Expressway To Link Purvanchal And Agra-Lucknow Corridors Approved By Cabinet — Daily Jagran (English), 4 जुलाई 2025
  12. आगरा एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे — Zee UP-उत्तराखंड, 3 जून 2026