कॉलम
लिंक एक्सप्रेसवे: लखनऊ का नया शहीद पथ — आंकड़े क्या कहते हैं
जानकारी जांची गई: | प्रकाशित: | एससीआर टाइम्स
शहीद पथ लखनऊ की वह सड़क है, जिसने कानपुर रोड से अयोध्या रोड जाने वाली गाड़ियों को पुराने शहर से बाहर निकाला। अब करीब 51 किमी का लिंक एक्सप्रेसवे यही काम पूरे इलाके के पैमाने पर करने जा रहा है। यह आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, ताकि पश्चिम से पूरब जाने वाली गाड़ियां लखनऊ शहर को छुए बिना निकल सकें। इसलिए मेरी नज़र में यह लखनऊ का नया शहीद पथ है। पर यह नाम उम्मीद के साथ एक चेतावनी भी है।
प्रोजेक्ट की मंज़ूरी, टेंडर और रूट का ब्योरा 20 अक्टूबर के कॉलम में है। यहां सवाल यह है कि यह सड़क असल में कितना बदलेगी।
शहीद पथ ने क्या बदला
शहीद पथ करीब 23 किमी की चार लेन वाली सड़क है। यह कानपुर रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर से शुरू होकर रायबरेली रोड और सुल्तानपुर रोड को पार करती है और अयोध्या रोड तक जाती है।3 इसे 1999–2000 में हाईवे के रूप में मंज़ूरी मिली थी।4 निर्माण 2001 में शुरू हुआ और सड़क 2012 में पूरी हुई।3 मक़सद साफ़ था: कानपुर रोड और अयोध्या रोड का ट्रैफ़िक शहर की तंग सड़कों से हटाना।3
चौदह साल बाद तस्वीर बदल चुकी है। जून 2026 में रक्षा मंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री को पत्र लिखा। उसके मुताबिक़ 2001 में लखनऊ की आबादी करीब 22 लाख और रजिस्टर्ड वाहन करीब 5 लाख थे। आज आबादी करीब 45 लाख और वाहन करीब 29 लाख हैं।4 यानी आबादी करीब दोगुनी हुई, पर वाहन लगभग छह गुना (हमारा हिसाब: 29 ÷ 5 = 5.8)। पत्र में यह भी कहा गया कि दोनों ओर अतिक्रमण के कारण शहीद पथ को चौड़ा करना अब मुमकिन नहीं, और कमता चौराहे पर रोज़ जाम लगता है।4
जुलाई 2026 में केंद्र ने एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक शहीद पथ पर 23 किमी के एलिवेटेड कॉरिडोर की DPR बनाने को मंज़ूरी दी।56 उसी मंच पर रक्षा मंत्री ने शहीद पथ को "लखनऊ की लाइफ़लाइन" कहा।5 13 जुलाई 2026 से 63 किमी का लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे भी शहीद पथ के पास से ही शुरू होता है।78
सबक सीधा है। 2012 का बायपास 2026 तक शहर की मुख्य सड़क बन गया। अब उसके ऊपर दूसरी सड़क बनाने की तैयारी है।
लिंक एक्सप्रेसवे किस समस्या का हल
302 किमी का आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे लखनऊ के बाहरी इलाके में SH-40 पर ख़त्म होता है।9 340.824 किमी का पूर्वांचल एक्सप्रेसवे सुल्तानपुर रोड (NH-731) पर चांद सराय गांव से शुरू होता है।10 दोनों के बीच का सफ़र शहर से होकर तय होता है।
जुलाई 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ यह भारी ट्रैफ़िक अवध चौराहा, तेलीबाग, अर्जुनगंज और गोसाईंगंज से गुज़रता है।12 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में भी शहीद पथ और अवध चौराहे के आसपास के रास्तों का ज़िक्र है।13 यानी लंबी दूरी का बोझ उसी शहीद पथ वाले इलाके पर पड़ रहा है, जो पहले से भरा है।
यह कमी काग़ज़ पर भी दर्ज है। जून 2022 की रिपोर्टों के मुताबिक़ UPEIDA की बोर्ड बैठक में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के कम ट्रैफ़िक की बात उठी। 1 से 26 मई 2022 के बीच टोल वसूली 17 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुक़ाबले 7.5 करोड़ रुपये से कम रही। बोर्ड ने जो वजहें गिनाईं, उनमें पहली थी लखनऊ आउटर रिंग रोड का अधूरा होना।1415 यानी एक्सप्रेसवे बनाने वाली संस्था ख़ुद मानती रही है कि लखनऊ में टूटी कड़ी पूरे नेटवर्क का ट्रैफ़िक रोकती है।
किसान पथ का सवाल। सच यह है कि यह भूमिका पहले किसान पथ (आउटर रिंग रोड) को निभानी थी। 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ रिंग रोड को आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे से सीधे और पूर्वांचल से NH-731 के ज़रिये जुड़ना था।16 मार्च 2024 में इसके बड़े हिस्से खुले, पर मोहान रोड से बख्शी का तालाब वाला हिस्सा तब चालू नहीं था।17 उसकी आज की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि हमें नहीं मिली। जुलाई 2025 की रिपोर्ट भी भारी गाड़ियों के शहर से गुज़रने की ही बात करती है।12
तो लिंक, किसान पथ से अलग क्या देता है? पहली बात, यह सीधे एक एक्सप्रेसवे से दूसरे तक जाएगा; बीच में NH-731 का हिस्सा नहीं पड़ेगा। दूसरी, यह छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड रास्ता होगा।1 इसकी डिज़ाइन स्पीड 120 किमी प्रति घंटा बताई गई है।1213 तीसरी, उस पर शहर का अपना ट्रैफ़िक नहीं चढ़ेगा। किसान पथ पर अब सर्विस रोड बनाने की घोषणा हुई है, जो बताती है कि वह भी धीरे-धीरे शहरी सड़क बन रहा है।5
आंकड़ों में फ़ायदा
| पैमाना | आंकड़ा | स्रोत या हिसाब |
|---|---|---|
| लंबाई | 50.98 किमी | जुलाई 2026 की कैबिनेट मंज़ूरी12 |
| कहां से कहां | आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे का किमी 294 (जलियामऊ) से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का किमी 6 (रतिया मऊ) | टेंडर की ख़बर11 |
| किन हिस्सों से बचाव | आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे के आख़िरी 8 किमी, शहर का पूरा हिस्सा, पूर्वांचल के पहले 6 किमी | हमारा हिसाब: 302 − 294 = 8911 |
| शहीद पथ से तुलना | करीब 2.2 गुना लंबा | हमारा हिसाब: 50.98 ÷ 23 |
| आज का समय (शहर से) | करीब 1.5–2 घंटे | मीडिया रिपोर्ट, आधिकारिक आंकड़ा नहीं18 |
| लिंक से समय | करीब 25–30 मिनट | मीडिया रिपोर्ट, आधिकारिक आंकड़ा नहीं1318 |
| डिज़ाइन स्पीड पर न्यूनतम समय | करीब 25.5 मिनट | हमारा हिसाब: 50.98 ÷ 120 × 60 |
| लागत | 4,775.84 करोड़ रुपये | कैबिनेट12 |
| लागत प्रति किमी | करीब 93.7 करोड़ रुपये | हमारा हिसाब: 4,775.84 ÷ 50.98 |
| तुलना के लिए | आगरा–लखनऊ: करीब 38.1 करोड़/किमी (ज़मीन छोड़कर); पूर्वांचल: करीब 66.0 करोड़/किमी (ज़मीन समेत) | हमारा हिसाब: 11,526.73 ÷ 302.2229; 22,494.66 ÷ 340.82410 |
| अनुमानित ट्रैफ़िक | सार्वजनिक नहीं | DPR या ट्रैफ़िक स्टडी का आंकड़ा हमें नहीं मिला |
दो बातें ध्यान रखें। 25–30 मिनट का दावा डिज़ाइन स्पीड पर ही मुमकिन है; ट्रकों को ज़्यादा समय लगेगा। और प्रति किमी लागत की तुलना पूरी तरह बराबर नहीं है, क्योंकि प्रोजेक्ट अलग-अलग साल के हैं। लिंक की लागत में ज़मीन शामिल है या नहीं, स्रोतों में साफ़ नहीं है।
शहर पर असर
सबसे बड़ा असर अवध चौराहा, तेलीबाग, अर्जुनगंज और गोसाईंगंज जैसे इलाकों पर होगा।12 मेरी नज़र में शहीद पथ के लिए यह एलिवेटेड कॉरिडोर से अलग तरह की राहत है। एलिवेटेड कॉरिडोर सड़क की क्षमता बढ़ाता है। लिंक उस ट्रैफ़िक को ही हटाता है, जिसका लखनऊ में कोई काम नहीं।
पर एक शर्त है: टोल। लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे का ताज़ा उदाहरण देखिए। NHAI के आंकड़ों के मुताबिक़ टोल-फ़्री होने से पहले उस पर रोज़ औसतन 8,869 वाहन चल रहे थे। टोल हटने के बाद यह संख्या 20 से 22 हज़ार तक पहुंच गई, और इसमें ट्रकों और भारी वाहनों का बड़ा हिस्सा था।19 यानी करीब ढाई गुना (हमारा हिसाब: 22,000 ÷ 8,869 ≈ 2.5)। UPEIDA बोर्ड ने भी 2022 में भारी वाहनों के ऊंचे टोल को पूर्वांचल पर कम ट्रैफ़िक की एक वजह माना था।14 साफ़ है कि ट्रक वाले रास्ता दाम देखकर चुनते हैं। लिंक का टोल अभी घोषित नहीं हुआ है।
नेटवर्क का असर। गंगा एक्सप्रेसवे उन्नाव जिले की सफ़ीपुर तहसील के नवाबगंज ग्रांट गांव में आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे से मिलता है।20 लिंक उससे आगे, लखनऊ वाले सिरे से करीब 8 किमी पहले, किमी 294 से निकलेगा।911 इसलिए मेरठ की ओर से आने वाली गाड़ियों को भी पूर्वांचल जाने का एक रास्ता मिलेगा, जो लखनऊ शहर से नहीं गुज़रता। उसी कैबिनेट ने फ़र्रुख़ाबाद होकर आगरा–लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला 90.84 किमी का दूसरा लिंक भी मंज़ूर किया।2 यानी लखनऊ नेटवर्क की रुकावट से उसका जंक्शन बन सकता है।
जहां सावधानी ज़रूरी
- निर्माण अभी शुरू नहीं। UPEIDA की टेंडर सूची में 18 फ़रवरी 2026 का टेंडर दर्ज है।21 21 जुलाई 2026 को कैबिनेट ने अंतिम RFP मंज़ूर किया, और काम के लिए करीब 36 महीने तय हुए।1 25 अक्टूबर 2026 तक ठेका दिए जाने या काम शुरू होने की आधिकारिक सूचना हमें नहीं मिली।
- आंकड़ों में अंतर। लंबाई 49.96 किमी12, 50.94 किमी11 और 50.98 किमी1 बताई गई है। लागत के दो आंकड़े हैं: 4,775.84 करोड़ रुपये1 और टेंडर की ख़बरों में 2,864.82 करोड़ रुपये11। दूसरे आंकड़े में क्या शामिल है, स्रोत नहीं बताते।
- ज़मीन। करीब 597 हेक्टेयर ज़मीन की बात आई थी।12 गांवों की संख्या पर स्रोत अलग-अलग हैं, जिनका ब्योरा पिछले कॉलम में है।
- किसान पथ से दोहराव। अगर किसान पथ का मोहान रोड वाला हिस्सा पूरी तरह चालू है, तो बायपास का कुछ फ़ायदा आज भी मिल रहा है। तब लिंक की असली क़ीमत बिना रुकावट वाली एक्सप्रेसवे कड़ी होने में है।
- ट्रैफ़िक का आधार सार्वजनिक नहीं। दोनों एक्सप्रेसवे पर रोज़ के वाहनों की आधिकारिक गिनती या लिंक का अनुमानित ट्रैफ़िक हमें नहीं मिला, इसलिए हमने कोई अनुमान नहीं गढ़ा।
- शहीद पथ वाला ख़तरा। एक्सेस-कंट्रोल ही लिंक को दूसरा जाम वाला शहीद पथ बनने से बचाएगा। इंटरचेंज और आसपास ज़मीन का इस्तेमाल SCR के रीजनल प्लान में सोच-समझकर तय होना चाहिए।
आपके लिए इसका मतलब
- लखनऊ में रहने वालों के लिए: शहर से लंबी दूरी के ट्रक हटने का फ़ायदा निर्माण शुरू होने के करीब तीन साल बाद दिखेगा। तब तक शहीद पथ का दबाव रहेगा; उसका एलिवेटेड कॉरिडोर भी अभी DPR के स्तर पर है।
- ट्रांसपोर्टरों के लिए: फ़ायदा टोल पर टिका है। टोल घोषित हो, तो उसे शहर वाले रास्ते के समय और ईंधन से तौलें।
- आगरा या मेरठ की ओर से अयोध्या, आज़मगढ़ या गाज़ीपुर जाने वालों के लिए: लिंक बनने तक मौजूदा रास्ते ही विकल्प हैं।
- लखनऊ और उन्नाव के गांवों के लिए: रूट का आधिकारिक नक्शा हमें नहीं मिला। किसी अनौपचारिक नक्शे पर भरोसा न करें; अपने गांव या ज़मीन के बारे में UPEIDA या अपनी तहसील से पुष्टि करें।
शहीद पथ ने लखनऊ को सिखाया कि बायपास बनाना आधा काम है; उसे बायपास बनाए रखना बाकी आधा। एससीआर टाइम्स ठेका, ज़मीन और टोल की पुष्ट जानकारी आते ही इसे अपडेट करेगा। सभी प्रोजेक्ट की स्थिति इंफ्रा ट्रैकर पर है।
स्रोत
- UP cabinet approves four expressway projects to strengthen state's road network — PTI / ThePrint, 21 जुलाई 2026
- UP Cabinet approves Rs 12,264 crore link expressways, clears Vindhya corridor alignment — Swarajya, 22 जुलाई 2026
- Shaheed Path — विकिपीडिया (सहायक स्रोत; टाइम्स ऑफ़ इंडिया, जून 2012 का हवाला)
- Rajnath Singh urges elevated corridor over Lucknow's Shaheed Path as widening becomes impossible — Swarajya, 19 जून 2026
- Centre approves DPR for 23-km Shaheed Path elevated corridor in Lucknow — Free Press Journal, 14 जुलाई 2026
- Gadkari announces road infra plan for Uttar Pradesh — Swarajya, 14 जुलाई 2026
- Awadh Expressway — विकिपीडिया (सहायक स्रोत)
- Lucknow-Kanpur Expressway to be inaugurated today — आकाशवाणी समाचार, 13 जुलाई 2026
- Agra – Lucknow Expressway — UPEIDA (आधिकारिक)
- The Purvanchal Expressway — UPEIDA (आधिकारिक)
- लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे का टेंडर जारी — पत्रिका, 3 मार्च 2026
- Expressway to link Purvanchal and Agra-Lucknow corridors approved by Cabinet — Daily Jagran (English), 4 जुलाई 2025
- Agra-Lucknow Expressway to Purvanchal Expressway in just 30 minutes — News24, 8 सितंबर 2026
- Purvanchal Expressway collects just 45 per cent of targeted toll in May — India Infra Hub, 20 जून 2022
- UP's Purvanchal Expressway gets only half of expected traffic — IANS / National Herald, 20 जून 2022
- Major Milestone: Commissioning of Purvanchal Expressway — Indian Infrastructure, 6 नवंबर 2021
- Lucknow Outer Ring Road (NH 230) — विकिपीडिया (सहायक स्रोत)
- Agra-Lucknow Expressway: New 51-km link could cut travel time to Purvanchal — Curly Tales, 7 सितंबर 2026 (NDTV की रिपोर्ट के हवाले से)
- टोल फ़्री होते ही लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे पर बढ़ा ट्रैफ़िक — अमर उजाला, 6 अगस्त 2026
- गंगा एक्सप्रेसवे: इंटरचेंज और टोल प्लाज़ा — आजतक, 28 अप्रैल 2026
- ई-टेंडर सूची: Agra Lucknow Expressway to Purvanchal Expressway Link Expressway, टेंडर ID 2026_UPEID_1117415_1, दिनांक 18.02.2026 — UPEIDA (आधिकारिक)
