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SCR इस हफ़्ते: PM MITRA टेक्सटाइल पार्क को डेवलपर, लिंक एक्सप्रेसवे का अगला कदम और लखनऊ के तीन वार्डों में पेयजल स्कीम

जानकारी जांची गई: | प्रकाशित: | एससीआर टाइम्स

SCR इस हफ़्ते₹1,947 करोड़SCR इस हफ़्ते · 1 नवंबरSCR Times · एससीआर टाइम्स

इस हफ़्ते की तीनों ख़बरें 27 अक्टूबर की प्रदेश कैबिनेट बैठक से हैं। लखनऊ–हरदोई सीमा पर बनने वाले PM MITRA टेक्सटाइल पार्क को मास्टर डेवलपर मिल गया है। आगरा–लखनऊ–पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए एजेंसी चुनने को मंज़ूरी मिली, और लखनऊ के तीन वार्डों के लिए अमृत 2.0 की पेयजल स्कीम भी पास हुई।

लखनऊ–हरदोई सीमा के PM MITRA पार्क को मिला मास्टर डेवलपर

कैबिनेट ने 27 अक्टूबर को PM MITRA मेगा टेक्सटाइल पार्क के मास्टर डेवलपर के चयन को मंज़ूरी दी। यह पार्क लखनऊ–हरदोई सीमा पर करीब 1,000 एकड़ में बनेगा।12 रैमकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड मास्टर डेवलपर होगी। टेंडर में एक ही बोली आई थी, जिसे कैबिनेट ने मंज़ूर किया।13 प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1,947 करोड़ रुपये है। केंद्र लागत के 30% तक, अधिकतम 500 करोड़ रुपये, की वायबिलिटी गैप फ़ंडिंग देगा।13 पार्क की कंपनी में राज्य की 51% और केंद्र की 49% हिस्सेदारी है। राज्य ने ज़मीन 99 साल के लिए एक रुपये प्रति एकड़ सालाना की लीज़ पर दी है। निर्माण पांच साल में होगा।12 सरकार को करीब एक लाख लोगों को सीधा और अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलने की उम्मीद है।13

आपके लिए इसका मतलब: कपड़ा उद्योग में काम ढूंढ रहे युवाओं और छोटे कारोबारियों के लिए लखनऊ के पास एक बड़ा ठिकाना तैयार होगा। हरदोई के हथकरघा से जुड़े बुनकरों को भी पास में नया बाज़ार मिल सकता है। निर्माण पांच साल का है, इसलिए नौकरियां धीरे-धीरे आएंगी।

लिंक एक्सप्रेसवे: बनाने वाली एजेंसी चुनने को मंज़ूरी

उसी बैठक में कैबिनेट ने चार लिंक एक्सप्रेसवे के लिए डेवलपर चुनने का प्रस्ताव मंज़ूर किया। इनमें आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक भी है।14 सरकारी नोट में इसकी लंबाई 50.940 किमी दी गई है। बाकी तीन फ़र्रुख़ाबाद, झांसी और जेवर लिंक हैं।1 चारों की कुल अनुमानित लागत करीब 17,542 करोड़ रुपये है। निर्माण करीब तीन साल में होगा, फिर पांच साल रखरखाव।15 काम UPEIDA की देखरेख में EPC मॉडल पर होगा।1 सरकारी नोट में न कंपनी का नाम है, न बोली की रक़म। इसलिए हम कोई नाम नहीं दे रहे। रूट और पुराने फ़ैसलों का ब्योरा हमारे कॉलम लिंक एक्सप्रेसवे कहां तक पहुंचा और लखनऊ का नया शहीद पथ में है।

आपके लिए इसका मतलब: प्रोजेक्ट काग़ज़ से ज़मीन की ओर एक कदम और बढ़ा है। निर्माण शुरू होने के करीब तीन साल बाद पश्चिम से पूरब जाने वाली गाड़ियां लखनऊ शहर से बचकर निकल सकेंगी। काम शुरू होने की तारीख़ अभी घोषित नहीं हुई है।

लखनऊ के तीन वार्डों के लिए अमृत 2.0 पेयजल प्रोजेक्ट

कैबिनेट ने 27 अक्टूबर को अमृत 2.0 के तहत लखनऊ और वाराणसी के सात प्रोजेक्ट मंज़ूर किए। इनमें लखनऊ नगर निगम का एक पेयजल प्रोजेक्ट है।12 ख़बरों के मुताबिक़ यह ऐशबाग, आलमनगर और केसरीखेड़ा वार्डों के लिए है।23 सरकारी नोट के मुताबिक़ इससे करीब 1.56 लाख लोगों को फ़ायदा होगा।13 लखनऊ प्रोजेक्ट की अलग लागत नहीं बताई गई है। सातों प्रोजेक्ट में केंद्र का हिस्सा करीब 696 करोड़ रुपये है। राज्य करीब 1,866 करोड़ और नगर निकाय करीब 223 करोड़ रुपये देंगे।12 बाकी छह प्रोजेक्ट वाराणसी के हैं, जिनमें सीवर और पेयजल दोनों के काम हैं।1

आपके लिए इसका मतलब: ऐशबाग, आलमनगर और केसरीखेड़ा के परिवारों को आगे चलकर पाइप से पानी की बेहतर सप्लाई मिल सकती है। काम कब शुरू होगा और कितने घरों को नया कनेक्शन मिलेगा, यह अभी घोषित नहीं हुआ है। कनेक्शन की जानकारी सिर्फ़ नगर निगम या जलकल विभाग से ही लें।

आगे क्या देखें

टेक्सटाइल पार्क में निर्माण शुरू होने और लिंक एक्सप्रेसवे की एजेंसी से करार की जानकारी जैसे ही आधिकारिक रूप से आएगी, हम बताएंगे। सभी बड़े प्रोजेक्ट की स्थिति इंफ्रा ट्रैकर पर है। SCR की बुनियादी बातें SCR क्या है में पढ़ें, और छहों जिलों का नक्शा SCR मैप पर देखें।