SCR गाइड
दाखिल-खारिज (नामांतरण) क्या है — UP में प्रक्रिया, क़ानून और अपील
दाखिल-खारिज (नामांतरण) वह प्रक्रिया है जिसमें नए मालिक का नाम राजस्व रिकॉर्ड, यानी खतौनी, में दर्ज होता है और पुराने का हटता है। उत्तर प्रदेश में यह राजस्व संहिता 2006 की धारा 33 से 35 के तहत होता है। खरीद पर रिपोर्ट तहसीलदार को जाती है और वे उद्घोषणा व जांच के बाद आदेश देते हैं।
जानकारी जांची गई:
दाखिल-खारिज, जिसे नामांतरण या म्यूटेशन भी कहते हैं, राजस्व रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदलने की प्रक्रिया है। "दाखिल" यानी नए मालिक का नाम दर्ज करना, "खारिज" यानी पुराने का हटाना। उत्तर प्रदेश में इसका क़ानून राजस्व संहिता, 2006 की धारा 33, 34 और 35 में है।1 बैनामे की रजिस्ट्री हो जाने के बाद भी खतौनी में नाम तभी बदलता है, जब नामांतरण का आदेश हो।
क़ानून क्या कहता है
| धारा | किस बारे में | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 33 | विरासत | विरासत में ज़मीन पाने वाला निर्धारित फ़ॉर्म में हलके के राजस्व निरीक्षक को सूचना देगा। विवाद न हो तो वे खतौनी में दर्ज करेंगे; विवाद हो तो जांच कर तहसीलदार को रिपोर्ट भेजेंगे। असंतुष्ट व्यक्ति तहसीलदार के पास आवेदन कर सकता है।1 |
| 34 | खरीद या हस्तांतरण | हस्तांतरण से ज़मीन पाने वाला उस तहसील के तहसीलदार को रिपोर्ट करेगा जहां ज़मीन है। पारिवारिक समझौता भी हस्तांतरण माना जाता है। प्रविष्टि की फ़ीस राज्य सरकार तय करती है और वह उसी से ली जाती है जिसके पक्ष में प्रविष्टि हो।1 |
| 35 | प्रक्रिया | तहसीलदार उद्घोषणा जारी करते हैं और ज़रूरी जांच करते हैं। विवाद न हो तो खतौनी में बदलाव का आदेश देते हैं; विवाद हो तो उसका फ़ैसला करके ज़रूरत हो तो बदलाव का आदेश देते हैं। आदेश के ख़िलाफ़ अपील SDM के पास 30 दिन में।1 |
तहसीलदार किसी रिपोर्ट के बिना भी, दूसरे तरीके से तथ्य पता चलने पर, यह प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।1
खरीद के बाद नामांतरण: क़दम-दर-क़दम
- रजिस्ट्री पूरी करें और बैनामे की प्रति, ई-स्टांप और फ़ीस की रसीद संभालकर रखें।
- तहसीलदार को रिपोर्ट / आवेदन दें। ज़मीन जिस तहसील में है, वहां के तहसीलदार के पास (धारा 34)।1 साथ में आम तौर पर बैनामे की प्रति, पुरानी खतौनी, खसरा नंबर, पहचान पत्र और शपथ पत्र मांगे जाते हैं।2 अपनी तहसील से सूची पक्की करें।
- मौक़े की जांच। लेखपाल ज़मीन पर जाकर जांच करते हैं, फिर मामला तहसीलदार के पास जाता है।2
- उद्घोषणा। तहसीलदार सार्वजनिक सूचना (उद्घोषणा) जारी करते हैं, ताकि कोई आपत्ति हो तो सामने आए (धारा 35)।1
- आदेश। आपत्ति न हो तो खतौनी में नया नाम दर्ज करने का आदेश होता है। आपत्ति हो तो तहसीलदार सुनवाई करके फ़ैसला करते हैं।1
- खतौनी जांचें। आदेश के बाद upbhulekh.gov.in पर खतौनी देखें कि नया नाम चढ़ा है या नहीं। तरीका खतौनी-खसरा पेज पर है।
- अपील (ज़रूरत हो तो)। आदेश से असहमत हों तो 30 दिन के भीतर SDM के पास अपील करें (धारा 35(2))।1
समय-सीमा पर एक बात: संहिता की धारा 34 और 35 में रिपोर्ट करने या फ़ैसला करने की कोई तय दिन-संख्या नहीं लिखी है।1 नियमावली और ज़िले के निर्देशों में समय-सीमा हो सकती है; उसकी पुष्टि हम सरकारी स्रोत से नहीं कर पाए। इसलिए रजिस्ट्री के तुरंत बाद आवेदन करें और आवेदन की रसीद व केस नंबर संभालें।
एक संपत्ति, कई नामांतरण
IGRS की "शुल्क विवरण" सूची नामांतरण को चार अलग जगहों में गिनाती है: भू-अभिलेख कार्यालय (तहसील), नगर निकाय, जल विभाग और बिजली विभाग।3 मतलब:
| रिकॉर्ड | कहां | कब ज़रूरी |
|---|---|---|
| खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड) | तहसील | जहां ज़मीन खतौनी में दर्ज हो, जैसे खेती की ज़मीन |
| हाउस टैक्स रिकॉर्ड | नगर निगम/पालिका/पंचायत | शहर में मकान, फ़्लैट या प्लॉट |
| पानी का कनेक्शन | जल विभाग/जल संस्थान | जहां कनेक्शन पुराने मालिक के नाम हो |
| बिजली कनेक्शन | बिजली वितरण कंपनी | जहां कनेक्शन पुराने मालिक के नाम हो |
विकास प्राधिकरण या आवास विकास की स्कीम वाली संपत्ति में उस संस्था के रिकॉर्ड की स्थिति भी उसी दफ़्तर से पूछ लें। लीज़ और फ़्रीहोल्ड संपत्ति का फ़र्क फ़्रीहोल्ड और लीज़होल्ड पेज पर है।
खेती की ज़मीन पर घर: धारा 80 से रिश्ता
नामांतरण सिर्फ़ मालिक का नाम बदलता है, ज़मीन की श्रेणी नहीं। खेती की ज़मीन पर घर या दुकान बनानी हो, तो राजस्व संहिता की धारा 80 के तहत गैर-कृषि घोषणा अलग प्रक्रिया है। अप्रैल 2026 के संशोधन के बाद, विकास प्राधिकरण से नक्शा या लेआउट पास हो तो उसे ही घोषणा माना जाता है, और राजस्व रिकॉर्ड में 15 दिन में प्रविष्टि होनी है।4 पूरी जानकारी भू-उपयोग और ज़ोनिंग पेज पर है।
SCR के संदर्भ में
SCR के छहों जिलों (लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी) के गांवों में खेती की ज़मीन का अधिकार-अभिलेख खतौनी ही है, जिसे क़ानून के तहत कलेक्टर हर गांव के लिए रखते हैं।1 स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की सलाह है कि खेती की ज़मीन ख़रीदने से पहले विक्रेता की खतौनी तहसील के रिकॉर्ड से मिलाई जाए।5 जिस विक्रेता का अपना नामांतरण अधूरा हो, उससे सौदे में जोखिम बढ़ता है। जिलों की जानकारी SCR के जिले पेज पर है।
आपके लिए इसका मतलब
- रजिस्ट्री के बाद रुकें नहीं। खतौनी में नाम न चढ़े, तो आगे बेचने, लोन लेने या मुआवज़े में दिक़्क़त हो सकती है।
- खरीदने से पहले देखें कि विक्रेता का नाम ख़ुद खतौनी में दर्ज है। सिर्फ़ बैनामा दिखाना काफ़ी नहीं।
- आपत्ति आए तो तहसीलदार के सामने अपने कागज़ रखें। फ़ैसले से असहमति हो तो 30 दिन की अपील-सीमा याद रखें।
- शहर की संपत्ति में नगर निगम, बिजली और पानी के रिकॉर्ड भी अलग से बदलवाएं।
- स्टांप ड्यूटी का हिसाब स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री फ़ीस पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज में क्या फ़र्क है?
दाखिल-खारिज के आदेश के ख़िलाफ़ अपील कहां और कितने दिन में?
विरासत (मृत्यु के बाद) में नामांतरण कैसे होता है?
दाखिल-खारिज की फ़ीस कितनी है?
लखनऊ शहर के मकान या फ़्लैट के लिए किसका नामांतरण कराना होता है?
स्रोत
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (अंग्रेज़ी पाठ) — धारा 30 से 35, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, उ.प्र. की वेबसाइट पर (PDF)
- Dakhil Kharij UP 2026: Mutation Guide — 1acre.in
- शुल्क विवरण (लेखपत्र पर देय स्टाम्प शुल्क / दाखिल-खारिज / नाम परिवर्तन / नक्शा) — IGRS उ.प्र.
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 — PRS Legislative Research
- लेखपत्र पंजीकरण के पूर्व सामान्य सावधानियां — स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, उ.प्र. (PDF)