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दस्तावेज़

SCR अधिनियम 2024: प्राधिकरण, कार्यकारी समिति, रीजनल प्लान की धाराएं

SCR अधिनियम 2024 वह कानून है जिसके तहत लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन और उसका प्राधिकरण बना। राज्यपाल ने 6 अगस्त 2024 को इसे मंज़ूरी दी, और यह 7 मार्च 2024 से लागू माना गया है।

जानकारी जांची गई: | एससीआर टाइम्स

SCR अधिनियम 2024 लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन की नींव है। पूरा नाम है उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र और अन्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2024। यही कानून सरकार को SCR और प्रदेश के दूसरे क्षेत्र बनाने, उनका प्राधिकरण गठित करने और रीजनल प्लान बनवाने का अधिकार देता है।1 कानून के उद्देश्य-कथन के मुताबिक़ 1973 के शहरी नियोजन कानून में क्षेत्रीय प्लानिंग का कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए यह कानून आया।1 SCR में कौन से जिले हैं और अब तक क्या हुआ, यह SCR क्या है पेज पर है।

एक नज़र में

विषय जानकारी
नाम उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र और अन्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2024 (उ.प्र. अधिनियम संख्या 6 सन 2024)
जारी करने वाला उत्तर प्रदेश विधानमंडल; प्रशासनिक विभाग: आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-31
तारीख़/GO राज्यपाल की मंज़ूरी 6 अगस्त 2024; असाधारण गजट अधिसूचना संख्या 337/79-वि-1-2024-1(क)-7-2024, लखनऊ, 6 अगस्त 20241
लागू कब से 7 मार्च 2024 से लागू माना गया (धारा 1(3)); अध्यादेश संख्या 4 सन 2024 निरस्त (धारा 44)1
आधिकारिक लिंक India Code पर अधिनियम; गजट प्रति — PRS Legislative Research (PDF)

कानून का ढांचा: आठ अध्याय, 44 धाराएं

अध्याय धाराएं किस बारे में
I 1–2 नाम, लागू होना, परिभाषाएं
II 3 SCR और दूसरे क्षेत्र बनाना, सीमा बदलना
III 4–7 प्राधिकरण और कार्यकारी समिति
IV 8–17 काम, अधिकार और रीजनल प्लान
V 18–21 फ़ंक्शनल प्लान, प्रोजेक्ट प्लान, विकास स्कीम, मास्टर प्लान
VI 22–28 फ़ंड, बजट, ऑडिट
VII 29–33 ज़मीन और संपत्ति
VIII 34–44 निर्देश, नियम, विघटन, निरसन

क्षेत्र और प्राधिकरण (धारा 3–7)

  • क्षेत्र (धारा 3): सरकार अधिसूचना से राजधानी के आसपास SCR और प्रदेश में दूसरे क्षेत्र बना सकती है। वह उनकी सीमा बदल सकती है, दो क्षेत्र मिला सकती है या एक को बांट सकती है। SCR का मुख्यालय लखनऊ होगा।1
  • प्राधिकरण (धारा 4): SCR के लिए "उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन विकास प्राधिकरण" बनता है। मुख्यमंत्री अध्यक्ष और मुख्य सचिव उपाध्यक्ष होते हैं। वित्त, राजस्व, नगर विकास, PWD, वन, सिंचाई, परिवहन जैसे विभागों के शीर्ष अफ़सर सदस्य होते हैं।1
  • इलाके के अफ़सर भी सदस्य: मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक। UP मेट्रो के प्रबंध निदेशक, रेलवे और रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि और अधिकतम पांच विशेषज्ञ भी।1
  • CEO: सरकार प्रमुख सचिव से नीचे के न होने वाले अफ़सर को CEO बनाती है। अलग नामांकन न हो, तो आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव CEO होंगे।1
  • बैठक: प्राधिकरण की बैठक हर तीन महीने में कम से कम एक बार होनी चाहिए।1
  • दूसरे राज्यों से तुलना: PRS की 2024 की राज्य-कानून समीक्षा बताती है कि उस साल हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने विकास प्राधिकरण बनाने वाले विधेयक पास किए, और UP कैपिटल रीजन वाले प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं।2
  • कार्यकारी समिति (धारा 5): CEO इसके अध्यक्ष होते हैं। सदस्यों में क्षेत्र के सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, CDO, नगर आयुक्त, UP मेट्रो के MD, PWD के मुख्य अभियंता और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रतिनिधि हैं।1

प्राधिकरण अपने काम के लिए विकास प्राधिकरणों, नगर निकायों और सरकारी विभागों की सेवाएं ले सकता है (धारा 4(6))।1 SCR के लिए LDA बेस मैप और रीजनल प्लान का काम कर रहा है। प्राधिकरण का अपना पेज SCR प्राधिकरण है।

काम और अधिकार (धारा 8–11)

  • मुख्य काम (धारा 8): रीजनल प्लान बनाना। विकास प्राधिकरणों, निकायों और विभागों के प्लान का तालमेल। निजी और सरकारी इंफ्रा प्रोजेक्ट को रीजनल प्लान के अनुरूप रखना। चुने हुए प्रोजेक्ट की फ़ंडिंग की व्यवस्था।1
  • अधिकार (धारा 9): विभागों से जानकारी मांगना, प्रोजेक्ट चुनना और मंज़ूर करना, निकायों और प्राधिकरणों को निर्देश देना। सबसे अहम धारा 9(f): विकास क्षेत्र घोषित करने और मास्टर प्लान मंज़ूर करने, बदलने व संशोधित करने के सरकारी अधिकार।1
  • कार्यकारी समिति (धारा 10): रीजनल और फ़ंक्शनल प्लान बनाने में मदद, प्रोजेक्ट और टेंडर की मंज़ूरी या अस्वीकृति, स्टाफ़ की नियुक्ति। प्राधिकरण की देखरेख में रोज़ का प्रबंधन इसी के पास है।1
  • सदस्य सचिव (धारा 11): सचिव स्तर से नीचे के न होने वाले पूर्णकालिक अफ़सर, जिनके पास प्राधिकरण के कार्यकारी अधिकार होते हैं।1

रीजनल प्लान और आपत्ति (धारा 12–17)

  1. क्या होगा (धारा 12): लिखित दस्तावेज़, नक्शों के साथ। इसमें भू-उपयोग नीति, हरित पट्टी, शहरी जंगल, बड़ी बसावट, सड़क-रेल-मेट्रो, पानी-सीवर, प्राथमिकता वाले इलाके और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रस्ताव होंगे।1
  2. सर्वे (धारा 13): प्राधिकरण सर्वे करा सकता है और विशेषज्ञ रख सकता है।1 सितंबर 2026 में मंज़ूर बेस मैप इसी चरण से जुड़ा है।
  3. ड्राफ्ट और आपत्ति (धारा 14): कार्यकारी समिति की मदद से ड्राफ्ट बनेगा। उसकी प्रति देखने के लिए रखी जाएगी और नोटिस छपेगा। नोटिस में दी गई तारीख़ तक कोई भी आपत्ति या सुझाव दे सकता है। स्थानीय निकायों को भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।1
  4. अंतिम प्लान (धारा 15): प्राधिकरण अंतिम प्लान की सूचना छापेगा, जिसमें लिखा होगा कि प्रति कहां देखी जा सकती है। पहली बार छपने की तारीख़ से प्लान लागू होगा।1
  5. बदलाव (धारा 16): छोटे बदलाव हो सकते हैं, पर पहले नोटिस और आपत्ति की प्रक्रिया होगी। भू-उपयोग के दायरे या आबादी घनत्व के मानक इस रास्ते से नहीं बदलते।1
  6. समीक्षा (धारा 17): हर 10 साल में पूरी समीक्षा, फिर से उसी आपत्ति-प्रक्रिया के साथ।1

रीजनल प्लान लागू होने के बाद प्राधिकरण फ़ंक्शनल प्लान, प्रोजेक्ट प्लान और विकास स्कीम बना सकता है (धारा 18–20)। हर विकास प्राधिकरण और निकाय अपना मास्टर प्लान रीजनल प्लान के अनुरूप बनाएगा (धारा 21)।1 पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में रीजनल प्लान गाइड में है।

ज़मीन, निर्देश और रोक (धारा 29–44)

  • अधिग्रहण (धारा 30): किसी प्लान में ज़रूरी, आरक्षित या चिह्नित ज़मीन 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सार्वजनिक प्रयोजन की मानी जाएगी।1
  • लैंड बैंक (धारा 31): प्राधिकरण एक "रीजन लैंड डेवलपमेंट बैंक" रखेगा, जिसमें उसकी सारी ज़मीन दर्ज होगी।1
  • सबसे ऊपर (धारा 34): इस कानून के प्रावधान प्रदेश के दूसरे कानूनों से टकराने पर भी लागू रहेंगे।1
  • प्लान से टकराव (धारा 36): अंतिम रीजनल प्लान के बाद उससे टकराने वाली कोई विकास योजना नहीं बनेगी। उल्लंघन पर प्राधिकरण नोटिस देकर रोक सकता है और निकायों की आर्थिक मदद रोक सकता है।1
  • प्रवेश (धारा 38): सर्वे के लिए अधिकृत व्यक्ति ज़मीन पर जा सकता है, पर किसी घर या उससे जुड़े आंगन-बगीचे में जाने से पहले कम से कम तीन दिन का लिखित नोटिस देना होगा।1
  • नियम (धारा 41–42): नोटिस का तरीका, सदस्यों की शर्तें जैसी बातें सरकार की नियमावली से तय होंगी। 2 नवंबर 2026 तक हमें इस कानून की नियमावली किसी सरकारी साइट पर नहीं मिली।

आपके लिए इसका मतलब

  • ज़मीन मालिक और किसान: ड्राफ्ट रीजनल प्लान आने पर अपने गांव का प्रस्तावित उपयोग देखें। आपत्ति का हक़ कानून देता है, पर तारीख़ नोटिस में होगी।
  • घर ख़रीदने वाले: ड्राफ्ट आने तक किसी इलाके के "रीजनल प्लान में कमर्शियल" होने का दावा बेबुनियाद है।
  • पंचायत और नगर निकाय: धारा 14 स्थानीय निकायों को अलग से अपनी बात रखने का मौका देती है।
  • कारोबारी: इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और पार्क रीजनल प्लान में तय होंगे। प्रोजेक्ट की स्थिति इंफ्रा ट्रैकर पर देखें।

प्राधिकरण कैसे बैठता और फ़ैसले लेता है, इस पर संपादक का विश्लेषण SCR प्राधिकरण कैसे काम करता है कॉलम में है। यह पेज कानूनी सलाह नहीं है। किसी ख़ास मामले में संबंधित प्राधिकरण या वकील से सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

SCR अधिनियम 2024 कब से लागू है?
धारा 1(3) के मुताबिक़ यह 7 मार्च 2024 से लागू माना गया है। राज्यपाल ने 6 अगस्त 2024 को विधेयक को मंज़ूरी दी और उसी दिन यह उ.प्र. अधिनियम संख्या 6 सन 2024 के रूप में असाधारण गजट में छपा। इसने 2024 के अध्यादेश संख्या 4 की जगह ली।
SCR प्राधिकरण का अध्यक्ष कौन होता है?
धारा 4 के मुताबिक़ मुख्यमंत्री अध्यक्ष और मुख्य सचिव उपाध्यक्ष होते हैं। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव सदस्य-संयोजक होते हैं।
रीजनल प्लान पर आम लोग आपत्ति कैसे दे सकेंगे?
धारा 14 के तहत प्राधिकरण ड्राफ्ट रीजनल प्लान की प्रति देखने के लिए रखेगा और नोटिस छापेगा। नोटिस में दी गई तारीख़ तक कोई भी आपत्ति या सुझाव दे सकता है। कानून में दिनों की संख्या तय नहीं है; नोटिस का तरीका नियमावली से तय होगा।
क्या SCR प्राधिकरण लखनऊ का मास्टर प्लान बदल सकता है?
धारा 9(f) SCR प्राधिकरण को क्षेत्र के विकास प्राधिकरणों के लिए विकास क्षेत्र घोषित करने और मास्टर प्लान मंज़ूर करने, बदलने व संशोधित करने के सरकारी अधिकार देती है। धारा 21 के मुताबिक़ हर विकास प्राधिकरण अपना मास्टर प्लान रीजनल प्लान के अनुरूप बनाएगा।
क्या रीजनल प्लान में दिखी ज़मीन का अधिग्रहण हो सकता है?
धारा 30 कहती है कि किसी प्लान में ज़रूरी, आरक्षित या चिह्नित ज़मीन 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सार्वजनिक प्रयोजन की ज़मीन मानी जाएगी। प्राधिकरण के अनुरोध पर सरकार उसका अधिग्रहण कर सकती है। मुआवज़ा और प्रक्रिया 2013 के कानून से तय होती है।