दस्तावेज़
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006: नामांतरण, धारा 80, बंटवारा और 2026 का संशोधन
उत्तर प्रदेश में खेती की ज़मीन का रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमा विवाद और गैर-कृषि घोषणा, सब राजस्व संहिता 2006 से चलते हैं। संहिता 11 फ़रवरी 2016 से पूरी तरह लागू है। अप्रैल 2026 में अध्यादेश से इसकी धारा 80 बदली।
जानकारी जांची गई: | एससीआर टाइम्स
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 गांव की ज़मीन का मूल कानून है। खतौनी-खसरा, नामांतरण (दाखिल-खारिज), खेत की सीमा के विवाद, खेती की ज़मीन को गैर-कृषि घोषित कराना और बंटवारा, सब इसी संहिता की धाराओं से चलते हैं।1 यह 11 फ़रवरी 2016 से पूरी तरह लागू है।1 SCR के छहों जिलों के गांवों में ज़मीन ख़रीदने-बेचने वालों के लिए यह सबसे काम का दस्तावेज़ है। सरकारी नाम राजस्व संहिता है; बोलचाल में इसे रेवेन्यू कोड भी कहते हैं।
एक नज़र में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| नाम | उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (उ.प्र. अधिनियम संख्या 8 सन 2012)2 |
| जारी करने वाला | उत्तर प्रदेश विधानमंडल; प्रशासनिक विभाग: राजस्व विभाग, उ.प्र. |
| तारीख़/GO | 2006 की संहिता; अब तक संशोधन: उ.प्र. अधिनियम 4/2016, 7/2019, 28/2020, 4/2021 और 10/2026 (India Code की सूची)1 |
| लागू कब से | धारा 1, 4–19, 233, 234: 18 दिसंबर 2015; बाकी: 11 फ़रवरी 20161 |
| आधिकारिक लिंक | India Code — संहिता का अंग्रेज़ी पाठ (PDF); खतौनी: upbhulekh.gov.in |
ज़मीन के रिकॉर्ड और सीमा (धारा 24, 30–32)
- खसरा और नक्शा (धारा 30): कलेक्टर हर गांव का नक्शा और खसरा रखते हैं। सीमा के बदलाव हर साल या तय अंतराल पर दर्ज होते हैं।1
- खतौनी (धारा 31): यह अधिकार-अभिलेख है। इसमें खातेदार, प्लॉट नंबर, क्षेत्रफल, हिस्सा, लगान और सरकारी या ग्राम पंचायत की ज़मीन दर्ज होती है।1
- ग़लती सुधार (धारा 32): SDM, तहसीलदार या राजस्व निरीक्षक बदलाव दर्ज करते हैं और साबित ग़लतियां ठीक करते हैं। नक्शे का सुधार कलेक्टर के आदेश से होता है। सिर्फ़ कब्ज़े के आधार पर, मालिकाना हक़ के उलझे सवाल वाला सुधार नहीं मांगा जा सकता।1
- सीमा विवाद (धारा 24): SDM अपनी ओर से या आवेदन पर संक्षिप्त जांच करके सीमा तय करते हैं। आधार सर्वे नक्शा होता है; यह संभव न हो तो मौजूदा कब्ज़ा। कोशिश तीन महीने में निपटारे की है। अपील मंडलायुक्त के पास 30 दिन में।1
खतौनी ऑनलाइन देखने का तरीका खतौनी और खसरा पेज पर है। लखनऊ के गांवों की जानकारी गांव खोज पर मिलेगी।
नामांतरण / दाखिल-खारिज (धारा 33–35)
| धारा | किस बारे में | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 33 | विरासत | वारिस राजस्व निरीक्षक को सूचना देता है। विवाद न हो तो सीधे दर्ज, विवाद हो तो जांच कर तहसीलदार को रिपोर्ट |
| 34 | ख़रीद या हस्तांतरण | नया मालिक तहसीलदार को रिपोर्ट करता है; प्रविष्टि की फ़ीस राज्य सरकार तय करती है |
| 35 | प्रक्रिया | तहसीलदार उद्घोषणा जारी कर जांच करते हैं; विवाद न हो तो खतौनी में बदलाव का आदेश; अपील SDM के पास 30 दिन में |
स्रोत: संहिता का पाठ।1 क़दम-दर-क़दम प्रक्रिया दाखिल-खारिज पेज पर है।
गैर-कृषि घोषणा: धारा 80
- कौन करता है: संक्रमणीय अधिकार वाले भूमिधर के आवेदन पर, या अपनी ओर से, SDM।1
- समय: आवेदन मिलने के 45 कार्य-दिवसों में फ़ैसला। इनकार का कारण लिखित में देना होता है। तय फ़ीस जमा हो और 45 दिन में फ़ैसला न हो, तो घोषणा हुई मानी जाती है।1
- भविष्य के उपयोग की घोषणा: अगर पांच साल में गैर-कृषि काम शुरू न हो, तो यह घोषणा ख़त्म हो जाती है।1
- फ़ीस: दर सरकार तय करती है। अपने रहने के घर के लिए घोषणा पर फ़ीस नहीं लगती।1
- घोषणा के बाद (धारा 81–83): ज़मीन पर हस्तांतरण की पाबंदियां हट जाती हैं और अगले कृषि वर्ष से भू-राजस्व नहीं लगता। ज़मीन फिर खेती में इस्तेमाल हो, तो SDM घोषणा रद्द कर सकते हैं।1
2026 का बदलाव और उसकी स्थिति
8 अप्रैल 2026 को राज्यपाल ने अध्यादेश संख्या 6 सन 2026 जारी किया, जो उसी दिन लागू हुआ। इसने धारा 80(8) में दो शर्तें जोड़ीं:32
- विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, विनियमित क्षेत्र, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण या आवास विकास परिषद के क्षेत्र में भवन, विकास या लेआउट की अनुमति मिल चुकी हो, तो वही धारा 80(2) की घोषणा मानी जाएगी।
- राजस्व रिकॉर्ड में 15 दिन के भीतर प्रविष्टि ज़रूरी होगी, और इस घोषणा पर कोई फ़ीस नहीं लगेगी।
23 मई 2026 को इसी विषय पर चौथा संशोधन अध्यादेश (संख्या 14) आया। दोनों की जगह लेने वाला विधेयक 4 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश हुआ, जो 8 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा।2 2 नवंबर 2026 तक इस विधेयक के पास होकर अधिनियम बनने की पुष्टि हमें किसी सरकारी स्रोत में नहीं मिली। अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कुछ जगह विभाग अब भी अलग धारा 80 प्रक्रिया और NOC मांग रहे थे।4
India Code की सूची में संहिता के संशोधनों में उ.प्र. अधिनियम संख्या 10 सन 2026 भी दर्ज है। इसने संहिता में ठीक क्या बदला, यह हम सरकारी पाठ से पुष्ट नहीं कर पाए।1 मास्टर प्लान के भू-उपयोग और धारा 80 का रिश्ता भू-उपयोग और ज़ोनिंग पेज समझाता है।
बंटवारा और सरकारी ज़मीन (धारा 67, 116)
- बंटवारा (धारा 116): कोई भूमिधर उस जोत के बंटवारे का मुक़दमा कर सकता है जिसका वह सह-खातेदार है। हर ऐसे मुक़दमे में ग्राम पंचायत को पक्षकार बनाना ज़रूरी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अगस्त 2023 के एक फ़ैसले में ऐसा मुक़दमा SDM की अदालत में दायर होने का ज़िक्र है।5
- सार्वजनिक ज़मीन पर कब्ज़ा (धारा 67): भूमि प्रबंधक समिति या लेखपाल की रिपोर्ट पर नोटिस के बाद बेदख़ली और हर्जाने की वसूली हो सकती है। अपील कलेक्टर के पास 30 दिन में।1
गांव की तालाब, चरागाह या रास्ते वाली ज़मीन ख़रीदने का जोखिम यहीं से समझ आता है। ऐसी ज़मीन का उपयोग बदलना आम तौर पर संभव नहीं होता।
आपके लिए इसका मतलब
- ज़मीन ख़रीदने से पहले: विक्रेता का नाम खतौनी में देखें और खसरा नंबर बैनामे से मिलाएं। सरकारी या ग्राम सभा की ज़मीन से बचें।
- रजिस्ट्री के बाद: नामांतरण के लिए तहसील में तुरंत आवेदन करें। आदेश से असहमत हों तो 30 दिन की अपील-सीमा याद रखें। रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी देखें।
- खेत पर घर या दुकान: प्राधिकरण क्षेत्र में नक्शा पास हो, तो अप्रैल 2026 के बदलाव से अलग धारा 80 घोषणा की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि जांच लें।
- सीमा विवाद: पहले SDM के पास धारा 24 का रास्ता है। नाप-जोख के लिए एरिया कन्वर्टर मदद करेगा।
यह पेज कानूनी सलाह नहीं है। किसी विवाद, अपील या ख़ास मामले में अपनी तहसील, राजस्व विभाग या वकील से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्व संहिता 2006 कब से लागू है?
खेत की मेड़ या सीमा का विवाद किसके पास जाता है?
धारा 80 की घोषणा में कितना समय लगता है?
क्या धारा 80 वाला 2026 का संशोधन अब कानून बन गया है?
परिवार की साझा ज़मीन का बंटवारा कैसे होता है?
स्रोत
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 — अंग्रेज़ी पाठ (संशोधनों की सूची सहित), धारा 1, 24, 30–35, 67, 80–83, India Code (PDF)
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 — उ.प्र. असाधारण गजट, 31 अगस्त 2026 की प्रति, PRS Legislative Research (PDF)
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 (अध्यादेश संख्या 6) — PRS Legislative Research (PDF)
- धारा 80 की अनिवार्यता ख़त्म, फिर भी मांगी जा रही एनओसी — अमर उजाला, मुज़फ़्फ़रनगर, 7 अक्टूबर 2026
- Paltoo Ram Yadav बनाम उ.प्र. राज्य, रिट-सी संख्या 10192/2023 — इलाहाबाद हाईकोर्ट, 18 अगस्त 2023 (LiveLaw पर PDF)