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दस्तावेज़

UP नगर योजना और विकास अधिनियम 1973: प्राधिकरण के अधिकार, मुख्य धाराएं

लखनऊ विकास प्राधिकरण और प्रदेश के दूसरे विकास प्राधिकरण उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम 1973 के तहत बनते हैं। मास्टर प्लान बनाने, नक्शा पास करने, अवैध निर्माण रोकने और शमन के अधिकार इसी कानून से आते हैं।

जानकारी जांची गई: | एससीआर टाइम्स

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 प्रदेश के विकास प्राधिकरणों का मूल कानून है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) भी इसी के तहत बना है।1 यह कानून सरकार को किसी शहरी इलाके को "विकास क्षेत्र" घोषित करने का अधिकार देता है। उसके बाद उस इलाके में मास्टर प्लान, नक्शे की अनुमति, अवैध निर्माण पर कार्रवाई और शमन, सब इसी कानून से चलते हैं।1 SCR अधिनियम 2024 में इसे "राष्ट्रपति अधिनियम संख्या 11 सन 1973" के रूप में दर्ज है।2 सरकारी शब्द नगर योजना और विकास अधिनियम है; बोलचाल में लोग इसे शहरी नियोजन कानून या "1973 का कानून" कहते हैं।

एक नज़र में

विषय जानकारी
नाम उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 (Uttar Pradesh Urban Planning and Development Act, 1973)
जारी करने वाला राष्ट्रपति अधिनियम संख्या 11 सन 1973; आज इसे आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उ.प्र. देखता है2
तारीख़/GO 1973; अब तक के संशोधनों में ताज़ा: संशोधन अधिनियम 2025 (अधिसूचना 46(2)/LXXIX-V-1-2025-1-ka-1-2025, 17 मार्च 2025)13
लागू कब से 1973 से; 2025 का संशोधन 5 फ़रवरी 2025 से लागू माना गया3
आधिकारिक लिंक India Code — अधिनियम का अंग्रेज़ी पाठ (PDF); India Code — नियम और उपविधियां

विकास क्षेत्र और प्राधिकरण (धारा 3–7)

  • धारा 3: सरकार गजट अधिसूचना से किसी इलाके को विकास क्षेत्र घोषित करती है। लखनऊ का विकास क्षेत्र 11 सितंबर 1974 को इसी धारा के तहत घोषित हुआ।14
  • धारा 4: सरकार उस क्षेत्र के लिए विकास प्राधिकरण बनाती है, जो एक निगमित निकाय होता है। 2025 के संशोधन ने धारा 4(3)(b) बदली: अब उपाध्यक्ष वह होगा जिसे राज्य सरकार नियुक्त या अधिकृत करे। धारा 4(4) हटा दी गई।3
  • धारा 7: प्राधिकरण का काम योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देना है। वह ज़मीन ले सकता है, उसका प्रबंधन कर सकता है, निर्माण करा सकता है और सेवाएं दे सकता है।1

SCR के छह जिलों में कौन सा प्राधिकरण कहां है, यह विकास प्राधिकरण पेज पर है। लखनऊ का प्राधिकरण पेज LDA है।

मास्टर प्लान और ज़ोनल प्लान (धारा 8–13)

धारा क्या कहती है
8 प्राधिकरण सर्वे करके मास्टर प्लान बनाता है, जो ज़ोन और भू-उपयोग तय करता है। मास्टर प्लान हर 10 साल में, या सरकार चाहे तो पहले, संशोधित होना चाहिए
9 हर ज़ोन का ज़ोनल डेवलपमेंट प्लान: साइट प्लान, उपयोग, घनत्व और निर्माण नियंत्रण
10 प्लान सरकार की मंज़ूरी के लिए जाता है; सरकार मंज़ूर, बदलाव या अस्वीकार कर सकती है
11 ड्राफ्ट छपता है, आपत्ति-सुझाव मांगे जाते हैं, स्थानीय निकाय अपनी बात रख सकते हैं
12 मंज़ूरी की सूचना पहली बार छपने की तारीख़ से प्लान लागू
13 प्राधिकरण छोटे बदलाव कर सकता है; सरकार नोटिस और आपत्ति के बाद कोई भी बदलाव कर सकती है

स्रोत: अधिनियम का पाठ।1 इसी प्रक्रिया से लखनऊ मास्टर प्लान 2031 धारा 10 और 11 के तहत मंज़ूर हुआ।4 SCR बनने के बाद SCR अधिनियम की धारा 9(f) ने मास्टर प्लान मंज़ूर करने के सरकारी अधिकार SCR प्राधिकरण को भी दिए हैं।2

नक्शे की अनुमति और प्लान के अनुरूप उपयोग (धारा 14–16)

  • धारा 14: विकास क्षेत्र घोषित होने के बाद कोई भी विकास या निर्माण उपाध्यक्ष की लिखित अनुमति से ही होगा। सरकारी विभागों को भी प्राधिकरण को 30 दिन पहले सूचना देनी होती है।1
  • धारा 15: आवेदन तय फ़ॉर्म और फ़ीस के साथ होता है। प्राधिकरण विकास शुल्क, म्यूटेशन चार्ज, स्टैकिंग फ़ीस और जल शुल्क ले सकता है (15(2-A))। अनुमति न देने से पहले आवेदक को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। अस्वीकृति के ख़िलाफ़ अध्यक्ष के पास 30 दिन में अपील हो सकती है (15(5))।1
  • धारा 15-A: कंप्लीशन की सूचना के तीन महीने में इनकार न आए, तो कंप्लीशन सर्टिफ़िकेट मिला माना जाता है।1
  • धारा 16: प्लान लागू होने के बाद ज़मीन और इमारत का उपयोग उसी के अनुरूप होगा।1

नक्शा पास कराने की आज की ऑनलाइन प्रक्रिया नक्शा पास पेज पर है। तकनीकी नियम (FAR, सेटबैक, ऊंचाई) UP बिल्डिंग बायलॉज़ 2025 में हैं, जो इसी कानून की धारा 57 के तहत जारी हुए।5

अवैध निर्माण: जुर्माना, ध्वस्तीकरण, शमन (धारा 26–32)

धारा प्रावधान
26(1) बिना अनुमति या मंज़ूरी के ख़िलाफ़ विकास पर 50,000 रुपये तक जुर्माना; पहली सज़ा के बाद भी जारी रहे तो हर दिन 2,500 रुपये तक
27 उपाध्यक्ष नोटिस और सुनवाई के बाद 15 से 40 दिन में निर्माण हटाने का आदेश दे सकते हैं; पालन न हो तो प्राधिकरण ख़ुद हटाकर ख़र्च भू-राजस्व की तरह वसूल सकता है; अध्यक्ष के पास 30 दिन में अपील
28 उपाध्यक्ष काम रोकने का आदेश दे सकते हैं; पुलिस की मदद ली जा सकती है
32 उपाध्यक्ष या अधिकृत अफ़सर मुक़दमे से पहले या बाद में शमन शुल्क लेकर अपराध का शमन कर सकते हैं

स्रोत: अधिनियम का पाठ।1 धारा 32 के तहत किस निर्माण का कितना शमन हो सकता है, यह 2025 के बायलॉज़ के अध्याय 16 में तय है। मास्टर प्लान के भू-उपयोग के ख़िलाफ़ या सार्वजनिक ज़मीन पर बना निर्माण शमन योग्य नहीं है।6

शुल्क और सरकार का नियंत्रण (धारा 33–57)

  • धारा 35 और 38: प्राधिकरण की स्कीम से ज़मीन की क़ीमत बढ़े, तो बेहतरी शुल्क लग सकता है, आम तौर पर बढ़ोतरी के एक-तिहाई तक।1
  • धारा 38-A और 38-B: मास्टर प्लान में भू-उपयोग बदलने पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, निजी डेवलपर पर सिटी डेवलपमेंट चार्ज, और ऊंचे उपयोग की अनुमति पर अर्बन यूज़ चार्ज।1
  • धारा 41: प्राधिकरण, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को सरकार के निर्देश मानने होते हैं।1
  • धारा 55–57: नियम सरकार बनाती है; रेगुलेशन और बायलॉज़ प्राधिकरण सरकार की पूर्व मंज़ूरी से बनाता है।1

इस कानून के तहत बने कुछ ताज़ा नियम: इम्पैक्ट फ़ीस नियमावली 2024 और ख़रीदने योग्य FAR फ़ीस नियमावली 2024 India Code पर क्रमशः 28 जनवरी और 28 फ़रवरी 2025 की तारीख़ से दर्ज हैं।7 भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नियमावली का तीसरा संशोधन 22 सितंबर 2026 को अधिसूचित हुआ, जिसकी प्रति LDA की वेबसाइट पर है।8 भू-उपयोग बदलवाने की प्रक्रिया भू-उपयोग और ज़ोनिंग पेज पर है।

आपके लिए इसका मतलब

  • घर बनाने वाले: विकास क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण पर जुर्माना, काम रोकने और ध्वस्तीकरण, तीनों का प्रावधान है। नक्शा पहले पास कराएं।
  • नोटिस मिला हो: धारा 27 के आदेश में सुनवाई और अपील का हक़ है। अपील की 30 दिन की सीमा याद रखें।
  • राय देनी है: मास्टर प्लान के ड्राफ्ट और बड़े बदलाव पर आपत्ति का मौका धारा 11 और 13 देती हैं।
  • छोटे कस्बे और गांव: हर इलाका किसी विकास क्षेत्र में नहीं आता। नक्शे या शमन से पहले अपने इलाके का प्राधिकरण पहचानें।

यह पेज कानूनी सलाह नहीं है। किसी नोटिस, अपील या ख़ास मामले में अपने विकास प्राधिकरण या वकील से सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

LDA को नक्शा पास करने और अवैध निर्माण गिराने का अधिकार कहां से मिलता है?
उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम 1973 से। धारा 14 और 15 विकास की अनुमति की बात करती हैं, धारा 27 ध्वस्तीकरण आदेश की और धारा 28 काम रोकने की। अनुमति उपाध्यक्ष या उनके अधिकृत अफ़सर देते हैं।
नक्शा रिजेक्ट हो जाए तो अपील कहां करें?
धारा 15(5) के तहत अनुमति न मिलने के आदेश के ख़िलाफ़ प्राधिकरण के अध्यक्ष के पास 30 दिन में अपील हो सकती है। ध्वस्तीकरण आदेश (धारा 27) के ख़िलाफ़ भी अध्यक्ष के पास 30 दिन में अपील होती है।
बिना अनुमति निर्माण पर कितना जुर्माना है?
धारा 26(1) में बिना अनुमति या मंज़ूरी के ख़िलाफ़ विकास पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना है। पहली सज़ा के बाद भी अपराध जारी रहे, तो हर दिन 2,500 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना हो सकता है।
शमन (कंपाउंडिंग) किस धारा में है?
धारा 32 में। उपाध्यक्ष या उनके अधिकृत अफ़सर शमन शुल्क लेकर अपराध का शमन कर सकते हैं। किस निर्माण का कितना शमन होगा, यह 2025 के बिल्डिंग बायलॉज़ के अध्याय 16 में है।
क्या 2025 या 2026 में यह कानून बदला है?
हां, 2025 में। संशोधन अधिनियम ने धारा 4 में उपाध्यक्ष की नियुक्ति का प्रावधान बदला; यह 5 फ़रवरी 2025 से लागू माना गया। 2 नवंबर 2026 तक हमें 2026 का कोई संशोधन अधिनियम नहीं मिला।

स्रोत

  1. उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 — अंग्रेज़ी पाठ (संशोधनों की सूची सहित), India Code (PDF)
  2. उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र और अन्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2024 — धारा 2(f) और 9, PRS Legislative Research (PDF)
  3. Uttar Pradesh Urban Planning and Development (Amendment) Act, 2025 — TeamLease RegTech
  4. लखनऊ महायोजना–2031 (कन्वर्ज़न स्वरूप) रिपोर्ट — लखनऊ विकास प्राधिकरण (PDF), प्राक्कथन और अध्याय 1
  5. भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां–2025 में संशोधन, दिनांक 21 नवंबर 2025 (4 जुलाई 2025 के शासनादेश का हवाला) — आवास बंधु (PDF)
  6. Model Building Construction and Development Byelaws, 2025 — अध्याय 16, LDA वेबसाइट (PDF)
  7. उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम — नियम और उपविधियों की सूची, India Code
  8. निर्माण एवं विकास उपविधि (Rules and By Laws) — लखनऊ विकास प्राधिकरण, 2 नवंबर 2026 को देखा