तहसील

हरदोई सदर तहसील — आबादी, कस्बे, रेल-सड़क, मेडिकल कॉलेज और गोपामऊ

हरदोई सदर आबादी और क्षेत्रफल, दोनों में हरदोई जिले की सबसे बड़ी तहसील है। ज़िला मुख्यालय, हरदोई जंक्शन और सरकारी मेडिकल कॉलेज इसी तहसील में हैं।

जानकारी जांची गई:

हरदोई सदर तहसील में 2011 की जनगणना के मुताबिक़ 11,99,103 लोग रहते थे।1 इसका क्षेत्रफल 1,585 वर्ग किमी है, जो जिले की पांचों तहसीलों में सबसे ज़्यादा है।1 ज़िला मुख्यालय हरदोई शहर, हरदोई जंक्शन और सरकारी मेडिकल कॉलेज, तीनों यहीं हैं। जिले के बाकी हिस्सों की जानकारी हरदोई जिले के पेज पर है।

एक नज़र में (जनगणना 2011)

क्या जानकारी
आबादी 11,99,103 — पुरुष 6,42,874, महिला 5,56,229
परिवार (हाउसहोल्ड) 2,14,025
लिंगानुपात 865 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष
0–6 साल के बच्चे 1,85,756 (15.49%)
अनुसूचित जाति 39.96%
क्षेत्रफल 1,585 वर्ग किमी
घनत्व 757 लोग प्रति वर्ग किमी
गांव 462
शहरी आबादी 2,12,555 (17.73%)
नगर निकाय हरदोई (नगर पालिका परिषद), गोपामऊ (नगर पंचायत)

स्रोत: जनगणना 2011 के तहसीलवार आंकड़े1 और जिले की सूची2।

साक्षरता: कुल आबादी में 56.58% लोग साक्षर थे (पुरुष 64.88%, महिला 46.98%)।1 यह पैमाना 0–6 साल के बच्चों को भी गिनता है। इसी पैमाने पर पूरे जिले का आंकड़ा 54.28% है, यानी सदर तहसील जिले से आगे है।1

हरदोई शहर

हरदोई नगर पालिका की आबादी 1,26,851 है (जनगणना 2011)।34 अवध पर अंग्रेज़ों के क़ब्ज़े (1856) के बाद ज़िले का मुख्यालय मल्लावां में बना था। 1857 के बाद इसे बीच में पड़ने वाले हरदोई में लाया गया।2 शहर का ‘नया’ हिस्सा उसी दौर के सिविल स्टेशन से विकसित हुआ। 1888 में बना विक्टोरिया हॉल नगर पालिका और ज़िले के दफ़्तरों, लाइब्रेरी और घंटाघर वाली इमारत रहा है।4

नाम को लेकर सबसे जानी-मानी परंपरा इसे ‘हरि-द्रोही’ से जोड़ती है, यानी हिरण्यकशिपु और भक्त प्रह्लाद की कथा से। इसी कारण शहर को ‘प्रह्लाद नगरी’ भी कहा जाता है।4 प्रह्लाद घाट जिले की जानी-मानी जगहों में गिना जाता है।2

गोपामऊ: गोमती किनारे का पुराना कस्बा

गोपामऊ नगर पंचायत की आबादी 15,526 है (जनगणना 2011)।5 यह गोमती नदी के ठीक पश्चिम में बसा है।5 गोमती ही हरदोई को सीतापुर से अलग करती है।3

  • लाल पीर की दरगाह (1232): कस्बे की सबसे पुरानी इमारत मानी जाती है।5
  • गोपीनाथ तालाब और मंदिर (1699): लाला नौनिद्ध राय ने बनवाए थे।5
  • जामा मस्जिद: भूकंप में गिरने के बाद 1786 में दोबारा बनी।5
  • काले हिरण: जिले में काले हिरण आम हैं, ख़ासकर गोपामऊ के आसपास।2

कैसे पहुंचें

  • रेल: हरदोई जंक्शन (कोड HRI) लखनऊ–मुरादाबाद–दिल्ली मुख्य लाइन पर है। यहां 5 प्लेटफ़ॉर्म हैं। लखनऊ मेल, चंडीगढ़–लखनऊ सुपरफ़ास्ट और राज्यरानी एक्सप्रेस यहां रुकती हैं।6
  • सड़क: NH-731 हरदोई को लखनऊ और शाहजहांपुर से जोड़ता है। NH-330D सीतापुर से हरदोई होकर बिलग्राम और कन्नौज जाता है। दोनों हाईवे हरदोई में मिलते हैं।7
  • दूरी: हरदोई से लखनऊ करीब 110 किमी है। लखनऊ हवाई अड्डा 115 से 119 किमी के बीच बताया गया है।3
  • गंगा एक्सप्रेसवे: सबसे पास के इंटरचेंज बिलग्राम तहसील में हैं।8

इलाज और पढ़ाई

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, हरदोई 2021 में शुरू हुआ। यह सीतापुर रोड पर गौरा डांडा में 17 एकड़ में बना है। यहां MBBS की 100 सीटें हैं।9 ज़िला अस्पताल इसका संबद्ध अस्पताल है, और कॉलेज अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय से जुड़ा है।10

आपके लिए इसका मतलब

  • नौकरी और कारोबार: ज़िले के सरकारी दफ़्तर, अदालतें, मेडिकल कॉलेज और रेल जंक्शन यहीं हैं। इसलिए ज़िले की ज़्यादातर सेवाएं और आवाजाही इसी तहसील से होकर जाती है।
  • ज़मीन के काग़ज़: गांव की ज़मीन के रिकॉर्ड इसी तहसील से जुड़े हैं। नाप बीघा में हो तो एरिया कन्वर्टर से वर्ग मीटर में बदलें, और रजिस्ट्री ख़र्च स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर से देखें।
  • घूमने: सांडी पक्षी विहार शहर से 19 किमी है, पर वह बिलग्राम तहसील में आता है।8

बाकी तहसीलें: संडीला | शाहाबाद | बिलग्राम | सवायजपुर

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हरदोई सदर तहसील की आबादी कितनी है?
जनगणना 2011 में हरदोई सदर तहसील की आबादी 11,99,103 थी। यह जिले की कुल आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा है। इनमें करीब 82% लोग गांवों में रहते थे।
हरदोई सदर तहसील में कौन-कौन से कस्बे हैं?
जनगणना 2011 के मुताबिक़ इस तहसील में दो नगर निकाय हैं: हरदोई नगर पालिका परिषद और गोपामऊ नगर पंचायत।
हरदोई मेडिकल कॉलेज कहां है?
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, हरदोई सीतापुर रोड पर गौरा डांडा में है। यह 2021 में शुरू हुआ और इसमें MBBS की 100 सीटें हैं।
हरदोई को प्रह्लाद नगरी क्यों कहते हैं?
परंपरा के मुताबिक़ ‘हरदोई’ नाम ‘हरि-द्रोही’ से बना माना जाता है, जो भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु से जुड़ी कथा है। इसी वजह से शहर को प्रह्लाद नगरी भी कहते हैं। नाम के बारे में दूसरी मान्यताएं भी हैं।